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  • एक परिंदा फड़फड़ाता हुआ
    रोज़ खिड़की पर आता है
    क्यूँ है इतना शोर बाहर
    ये समझ नहीं पाता है
    कहां गयीं वो पेड़ों की शाखें
    ये सोचता रह जाता है
    जिसका पानी सबसे मीठा था
    उस झरने को तरस जाता है
    वो नीला आसमां जिसमें वो उड़ता था
    किसी और रंग का क्यूँ नज़र आता है
    ख़ुदा ने सबको आज़ादी दी
    सोचता फ़िर ये पिंजरे कौन बनाता है l
    "मोरनी"
    एक परिंदा फड़फड़ाता हुआ रोज़ खिड़की पर आता है क्यूँ है इतना शोर बाहर ये समझ नहीं पाता है कहां गयीं वो पेड़ों की शाखें ये सोचता रह जाता है जिसका पानी सबसे मीठा था उस झरने को तरस जाता है वो नीला आसमां जिसमें वो उड़ता था किसी और रंग का क्यूँ नज़र आता है ख़ुदा ने सबको आज़ादी दी सोचता फ़िर ये पिंजरे कौन बनाता है l "मोरनी"
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  • चलो...
    आज थोड़ी बात करते हैं
    जो छूट गया है पिछे
    उससे मुलाक़ात करते हैं
    ख्वाहिशें जो बचपन में पाली थीं
    आज उनको फिर से दोहराते हैं
    कोई कहता मैं बनूँगा डॉक्टर
    कोई इंजीनियर बनना चाहता था
    कोई कहता मैं तो बनूँगा DC
    कोई मास्टर बनना चाहता था
    बनकर एक अध्यापक अब
    तुमको वो याद दिलाते हैं
    जो रह गयीं अधूरी चाहतें अब
    उनको पूरा करवाते हैं
    माना कि सबकुछ हासिल हो नहीं सकता
    पर कोशिश तो करके जाते हैं
    चलो अब इन्हीं तमन्नाओं संग
    सपनों को पूरा करते हैं l
    "मोरनी"

    चलो... आज थोड़ी बात करते हैं जो छूट गया है पिछे उससे मुलाक़ात करते हैं ख्वाहिशें जो बचपन में पाली थीं आज उनको फिर से दोहराते हैं कोई कहता मैं बनूँगा डॉक्टर कोई इंजीनियर बनना चाहता था कोई कहता मैं तो बनूँगा DC कोई मास्टर बनना चाहता था बनकर एक अध्यापक अब तुमको वो याद दिलाते हैं जो रह गयीं अधूरी चाहतें अब उनको पूरा करवाते हैं माना कि सबकुछ हासिल हो नहीं सकता पर कोशिश तो करके जाते हैं चलो अब इन्हीं तमन्नाओं संग सपनों को पूरा करते हैं l "मोरनी"
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  • जब कुछ ना कहने का मन करे
    तो तुम बैठ जाना मेरे पास चुपचाप
    किताबों की शौकिन मैं
    खामोशी से परेशान नहीं होती
    फ़िर पढ़ना ये आंखें
    जो किताबों में तुम्हें ही तो ढूँढती हैं
    तुम्हें इनमें दिखेंगी कई हसरतें
    दिखेंगे कुछ अधूरे अल्फाज़
    "मोरनी"



    जब कुछ ना कहने का मन करे तो तुम बैठ जाना मेरे पास चुपचाप किताबों की शौकिन मैं खामोशी से परेशान नहीं होती फ़िर पढ़ना ये आंखें जो किताबों में तुम्हें ही तो ढूँढती हैं तुम्हें इनमें दिखेंगी कई हसरतें दिखेंगे कुछ अधूरे अल्फाज़ "मोरनी"
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  • कोई ऐसी दुनिया हो जहां ये दुनिया ना हो
    ना शोर ए ज़माना ना चेहरे के पीछे चेहरा
    ना बातों में ज़हर ना मुस्कुराहटों में दग़ा
    जहाँ दिल धङके बस जीने के लिए
    ना टूटने के लिए ना किसी और के लिए
    जहां मुहब्बत वादा ना हो
    बस एक खामोश यकीं हो
    तुम हो मैं हूँ और चाय की दो प्याली हों
    कुछ ऐसी दुनिया हो l
    "मोरनी"
    कोई ऐसी दुनिया हो जहां ये दुनिया ना हो ना शोर ए ज़माना ना चेहरे के पीछे चेहरा ना बातों में ज़हर ना मुस्कुराहटों में दग़ा जहाँ दिल धङके बस जीने के लिए ना टूटने के लिए ना किसी और के लिए जहां मुहब्बत वादा ना हो बस एक खामोश यकीं हो तुम हो मैं हूँ और चाय की दो प्याली हों कुछ ऐसी दुनिया हो l "मोरनी"
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  • नदी को मंज़िल अज़ीज है
    पहाड़ को बस उसका साथ
    समुद्र को अज़ीज है गहराई
    लहरों को किनारे का साथ
    कहानी को अज़ीज हैं पात्र
    और शब्दों को उनका साथ
    किताबों को अज़ीज हैं दिल
    और दिल को जज्बातों का साथ
    मुझे अज़ीज है चाय
    और उसको मेरा साथ l
    "मोरनी"


    नदी को मंज़िल अज़ीज है पहाड़ को बस उसका साथ समुद्र को अज़ीज है गहराई लहरों को किनारे का साथ कहानी को अज़ीज हैं पात्र और शब्दों को उनका साथ किताबों को अज़ीज हैं दिल और दिल को जज्बातों का साथ मुझे अज़ीज है चाय और उसको मेरा साथ l "मोरनी"
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  • आँखें सच्ची हैं तुम्हारी
    इन्हें रोने मत देना
    साफ़ दिल रखते हो
    इसे खोने मत देना
    ज़माना मतलब का है
    तुम ख़ुद को स्वार्थी होने मत देना
    बांटना गम सबके
    पर अपनी खुशी खोने मत देना
    कोई अगर तुम्हारा है तो वो तुम हो
    तुम खुद को कभी भी खोने मत देना l
    "मोरनी"
    आँखें सच्ची हैं तुम्हारी इन्हें रोने मत देना साफ़ दिल रखते हो इसे खोने मत देना ज़माना मतलब का है तुम ख़ुद को स्वार्थी होने मत देना बांटना गम सबके पर अपनी खुशी खोने मत देना कोई अगर तुम्हारा है तो वो तुम हो तुम खुद को कभी भी खोने मत देना l "मोरनी"
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  • तुम्हें ढूँढने के लिए
    किताबों का सहारा लिया
    हर कहानी के दो किरदारों में
    हम दोनों रहे l
    जब भी कोई किताब पूरी होती
    तो लगता के तुम साथ छोड़ रहे हो
    पर फ़िर एक नई कहानी और फ़िर वही हम दोनों
    साथ चल रहे हैं नदी के किनारों की तरह
    मैं रात सी तुम ख्वाब से
    तुम हर शब्द में मैं हर अर्थ में
    तुम ख़ामोश से मैं शोर सी
    दोनों ही एक जीवंत कहानी
    "मोरनी"
    तुम्हें ढूँढने के लिए किताबों का सहारा लिया हर कहानी के दो किरदारों में हम दोनों रहे l जब भी कोई किताब पूरी होती तो लगता के तुम साथ छोड़ रहे हो पर फ़िर एक नई कहानी और फ़िर वही हम दोनों साथ चल रहे हैं नदी के किनारों की तरह मैं रात सी तुम ख्वाब से तुम हर शब्द में मैं हर अर्थ में तुम ख़ामोश से मैं शोर सी दोनों ही एक जीवंत कहानी ❤️ "मोरनी"
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  • तुम...
    प्रेम पाना चाहते हो...
    मैं...
    प्रेम होना चाहती हूँ...
    तुम...
    प्रेम पर मर मिटने की बात करते हो...
    मैं...
    प्रेम को जीना चाहती हूँ...
    तुम...
    प्रेम को समेटने की चाह रखते हो...
    मैं ...
    रज कण सी बिखरना चाहती हूँ...
    तुम...
    प्रेम में बँधना - बाँधना चाहते हो...
    मैं....
    ममत्व और मैं से मुक्ति चाहती हूँ...
    तुम ...
    पत्थर पर प्रेम लिखना चाहते हो...
    मैं...
    हवाओं में प्रेम पढ़ना चाहती हूँ...
    "मोरनी"

    तुम... प्रेम पाना चाहते हो... मैं... प्रेम होना चाहती हूँ... तुम... प्रेम पर मर मिटने की बात करते हो... मैं... प्रेम को जीना चाहती हूँ... तुम... प्रेम को समेटने की चाह रखते हो... मैं ... रज कण सी बिखरना चाहती हूँ... तुम... प्रेम में बँधना - बाँधना चाहते हो... मैं.... ममत्व और मैं से मुक्ति चाहती हूँ... तुम ... पत्थर पर प्रेम लिखना चाहते हो... मैं... हवाओं में प्रेम पढ़ना चाहती हूँ... "मोरनी"
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  • जाग गया कोई दिल में उजाले सा
    वैसे तो अभी बहुत रात बाकी है

    यूँ तो मिलता है ख्यालों में मुझसे
    रूबरू अभी मुलाकात बाकी है

    बादल छाए हैं दिल में अरसे से
    आँखों से अभी बरसात बाकी है

    मिला है मुक्कदस(पवित्र)सा मुक्कदर
    गम की मगर सौगात बाकी है

    जिंदा रहें उसके वजूद में बस
    कुदरत की यही करामात बाकी है

    कहानी तो मुक्कमल हो ही गई
    छोटी सी मगर कोई बात बाकी है

    कसैला सा धुआं फैला है मन में
    मीठा सा कोई ज़ज्बात बाकी है....
    "मोरनी"
    जाग गया कोई दिल में उजाले सा वैसे तो अभी बहुत रात बाकी है यूँ तो मिलता है ख्यालों में मुझसे रूबरू अभी मुलाकात बाकी है बादल छाए हैं दिल में अरसे से आँखों से अभी बरसात बाकी है मिला है मुक्कदस(पवित्र)सा मुक्कदर गम की मगर सौगात बाकी है जिंदा रहें उसके वजूद में बस कुदरत की यही करामात बाकी है कहानी तो मुक्कमल हो ही गई छोटी सी मगर कोई बात बाकी है कसैला सा धुआं फैला है मन में मीठा सा कोई ज़ज्बात बाकी है.... "मोरनी"
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  • इतनी गहराई से लिखूँगी लफ्जों में तुमको
    के पढ़ने वालों को तलब हो जाएगी तुम्हें देखने की
    तुम्हें बनाकर रखूंगी वो आख़री पन्ना
    के जिसे ना पलटने की जरूरत ना फाडने की
    नजाकत और सलीका भी बरक़रार रखूंगी
    के बचाकर रखूं तुम्हें नजरों से ज़माने की
    ना होगी कोई फ़िक्र मुझे किसी अंजाम की
    के तुम मंज़िल हो इस अफ़साने की l
    "मोरनी"
    इतनी गहराई से लिखूँगी लफ्जों में तुमको के पढ़ने वालों को तलब हो जाएगी तुम्हें देखने की तुम्हें बनाकर रखूंगी वो आख़री पन्ना के जिसे ना पलटने की जरूरत ना फाडने की नजाकत और सलीका भी बरक़रार रखूंगी के बचाकर रखूं तुम्हें नजरों से ज़माने की ना होगी कोई फ़िक्र मुझे किसी अंजाम की के तुम मंज़िल हो इस अफ़साने की l "मोरनी"
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