सुकूं से इश्क़ कर बैठी हूँ
अब नहीं भाता कुछ और
शोर शराबों से दूर रहती हूँ
अब तन्हाई पसन्द है
भीड़ से सिहरन में रहती हूँ
इस ख़ामोशी में कुछ तो बात है
जो ग़मों को कुछ कम सहती हूँ
ख़ुद को ख़ुद का अज़ीज़ बना रखा है
हाँ सुकूं से इश्क़ कर रखा है l
"मोरनी"
अब नहीं भाता कुछ और
शोर शराबों से दूर रहती हूँ
अब तन्हाई पसन्द है
भीड़ से सिहरन में रहती हूँ
इस ख़ामोशी में कुछ तो बात है
जो ग़मों को कुछ कम सहती हूँ
ख़ुद को ख़ुद का अज़ीज़ बना रखा है
हाँ सुकूं से इश्क़ कर रखा है l
"मोरनी"
सुकूं से इश्क़ कर बैठी हूँ
अब नहीं भाता कुछ और
शोर शराबों से दूर रहती हूँ
अब तन्हाई पसन्द है
भीड़ से सिहरन में रहती हूँ
इस ख़ामोशी में कुछ तो बात है
जो ग़मों को कुछ कम सहती हूँ
ख़ुद को ख़ुद का अज़ीज़ बना रखा है
हाँ सुकूं से इश्क़ कर रखा है l
"मोरनी"