Sponsored
तुम...
प्रेम पाना चाहते हो...
मैं...
प्रेम होना चाहती हूँ...
तुम...
प्रेम पर मर मिटने की बात करते हो...
मैं...
प्रेम को जीना चाहती हूँ...
तुम...
प्रेम को समेटने की चाह रखते हो...
मैं ...
रज कण सी बिखरना चाहती हूँ...
तुम...
प्रेम में बँधना - बाँधना चाहते हो...
मैं....
ममत्व और मैं से मुक्ति चाहती हूँ...
तुम ...
पत्थर पर प्रेम लिखना चाहते हो...
मैं...
हवाओं में प्रेम पढ़ना चाहती हूँ...
"मोरनी"

तुम... प्रेम पाना चाहते हो... मैं... प्रेम होना चाहती हूँ... तुम... प्रेम पर मर मिटने की बात करते हो... मैं... प्रेम को जीना चाहती हूँ... तुम... प्रेम को समेटने की चाह रखते हो... मैं ... रज कण सी बिखरना चाहती हूँ... तुम... प्रेम में बँधना - बाँधना चाहते हो... मैं.... ममत्व और मैं से मुक्ति चाहती हूँ... तुम ... पत्थर पर प्रेम लिखना चाहते हो... मैं... हवाओं में प्रेम पढ़ना चाहती हूँ... "मोरनी"
0 Comments 0 Shares 106 Views
Sponsored