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  • हम नये शहर में यादें पुरानी लिए बैठे हैं
    कुछ बिसरी बातें जुबानी लिए बैठे हैं
    चेहरे पर दर्द ओ गम की शिकन सी
    इन आँखों में हल्का सा पानी लिए बैठे हैं
    हर लम्हा बस उन्हीं चेहरों का तसव्वुर
    ये दिल दिमाग जिद्द बचकानी लिए बैठे हैं
    कई साल संग में रहे वो हमसफ़र
    और हम सालों को अब तक लिए बैठे हैं
    मेरे फसाने का ना पूछो तो अच्छा है
    हम तो ये सारी आफतें बेगानी लिए बैठे हैं l
    "मोरनी"
    हम नये शहर में यादें पुरानी लिए बैठे हैं कुछ बिसरी बातें जुबानी लिए बैठे हैं चेहरे पर दर्द ओ गम की शिकन सी इन आँखों में हल्का सा पानी लिए बैठे हैं हर लम्हा बस उन्हीं चेहरों का तसव्वुर ये दिल दिमाग जिद्द बचकानी लिए बैठे हैं कई साल संग में रहे वो हमसफ़र और हम सालों को अब तक लिए बैठे हैं मेरे फसाने का ना पूछो तो अच्छा है हम तो ये सारी आफतें बेगानी लिए बैठे हैं l "मोरनी"
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  • सपनों की ख़ातिर अपनों को छोड़ना ही होगा
    तुम्हें अगर उड़ान भरनी है
    तो पिंजरों को तोड़ना ही होगा
    यहां कोई नहीं ऐसा जिसे आराम से सब मिल गया
    सोना तभी निखरा जब जब आग में तपा
    तुम भी उसी रास्ते का हिस्सा हो
    तो खूब तपो प्यारे बच्चों
    ताकि तुम्हारे पास भी कल को बताने को किस्सा हो l
    "मोरनी"
    सपनों की ख़ातिर अपनों को छोड़ना ही होगा तुम्हें अगर उड़ान भरनी है तो पिंजरों को तोड़ना ही होगा यहां कोई नहीं ऐसा जिसे आराम से सब मिल गया सोना तभी निखरा जब जब आग में तपा तुम भी उसी रास्ते का हिस्सा हो तो खूब तपो प्यारे बच्चों ताकि तुम्हारे पास भी कल को बताने को किस्सा हो l "मोरनी"
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  • ये बनारस सी गलियां
    उसके आस-पास होने का एहसास दिलाती हैं
    साथ में चाँद को देखते देखते चलना
    बहुत से ख़यालों को लपेटे रहना
    जहाँ भी जाऊँ सदाएं देती हैं
    वापिस बुलाती हैं
    यहाँ का हर कोना उसकी महक से तारी(fresh) है
    इश्क़ कल तक उसने निभाया
    आज मेरी बारी है l
    "मोरनी"
    ये बनारस सी गलियां उसके आस-पास होने का एहसास दिलाती हैं साथ में चाँद को देखते देखते चलना बहुत से ख़यालों को लपेटे रहना जहाँ भी जाऊँ सदाएं देती हैं वापिस बुलाती हैं यहाँ का हर कोना उसकी महक से तारी(fresh) है इश्क़ कल तक उसने निभाया आज मेरी बारी है l "मोरनी"
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  • सिरसा...
    ये शहर बहुत पसन्द है मुझे
    जब भी यहां आती हूँ
    लगता है घर आ गया
    इसका एक एक कोना
    एक एक हिस्सा याद है मुझे
    वो संकरी गलियां
    वो खुले मिजाज़ के लोग
    वो सखियाँ वो नाते
    पूरा मुहल्ला मिलकर त्योहार मनाते
    किसी से हो या ना हो
    इस शहर से मुहब्बत है मुझे l
    "मोरनी"

    सिरसा... ये शहर बहुत पसन्द है मुझे जब भी यहां आती हूँ लगता है घर आ गया इसका एक एक कोना एक एक हिस्सा याद है मुझे वो संकरी गलियां वो खुले मिजाज़ के लोग वो सखियाँ वो नाते पूरा मुहल्ला मिलकर त्योहार मनाते किसी से हो या ना हो इस शहर से मुहब्बत है मुझे l "मोरनी"
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  • अहम को खरा भी खोटा नज़र आता है
    कीड़े को आक भी बरगद नज़र आता है
    अकल से अपाहिज का दोष कोई नहीं
    क्यूँकि दूर से और ग़ुरूर से हर कोई छोटा नज़र आता है l
    अहम को खरा भी खोटा नज़र आता है कीड़े को आक भी बरगद नज़र आता है अकल से अपाहिज का दोष कोई नहीं क्यूँकि दूर से और ग़ुरूर से हर कोई छोटा नज़र आता है l
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  • या तर्क कर या तकरार कर
    जो भी है इज़हार कर
    दिल को दिल और दिमाग़ को दिमाग़ रहने दे
    पासे एक कर या नफ़रत कर या प्यार कर
    मुँह पर और, पीठ पीछे और
    क्यूँ रखता है मन में चोर
    इस चोर का भोरा नी ज़ोर
    ऐसे ही करता है मन कमज़ोर
    दो कर बेशक चार कर
    गिनती तेरी है बेशक हज़ार कर
    पर पासे एक कर
    नफ़रत कर या प्यार कर l
    "मोरनी"
    या तर्क कर या तकरार कर जो भी है इज़हार कर दिल को दिल और दिमाग़ को दिमाग़ रहने दे पासे एक कर या नफ़रत कर या प्यार कर मुँह पर और, पीठ पीछे और क्यूँ रखता है मन में चोर इस चोर का भोरा नी ज़ोर ऐसे ही करता है मन कमज़ोर दो कर बेशक चार कर गिनती तेरी है बेशक हज़ार कर पर पासे एक कर नफ़रत कर या प्यार कर l "मोरनी"
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  • बच्चे सा बन जाना चाहती हूँ
    बच्चे सा मन पाना चाहती हूँ
    वो सब कुछ पाना चाहती हूँ
    दोबारा बचपन जीना चाहती हूँ
    बाहों भरा संसार पाना चाहती हूँ
    आँखों भर गगन पाना चाहती हूँ
    धूल में मिल जाना चाहती हूँ
    मिट्टी में सन जाना चाहती हूँ
    बाप की उंगली थामना चाहती हूँ
    माँ का आंचल पाना चाहती हूँ
    मैं फ़िर से बचपन को जीना चाहती हूँ
    "मोरनी"
    बच्चे सा बन जाना चाहती हूँ बच्चे सा मन पाना चाहती हूँ वो सब कुछ पाना चाहती हूँ दोबारा बचपन जीना चाहती हूँ बाहों भरा संसार पाना चाहती हूँ आँखों भर गगन पाना चाहती हूँ धूल में मिल जाना चाहती हूँ मिट्टी में सन जाना चाहती हूँ बाप की उंगली थामना चाहती हूँ माँ का आंचल पाना चाहती हूँ मैं फ़िर से बचपन को जीना चाहती हूँ "मोरनी"
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  • कुछ ख़ामोशियां शब्दों से ज्यादा बोल जाती हैं,
    मन और मौन पढ़ना हर कोई नहीं जानता l
    खटखटाते पुकारते हुए ख्वाहिशें आ ही जाती हैं,
    रूह को सुनना हर कोई नहीं जानता l
    दूसरों पर तो दुनिया बहुत कुछ लिख जाती है,
    दिल के राज लिखना कोई नहीं चाहता l
    "मोरनी"
    कुछ ख़ामोशियां शब्दों से ज्यादा बोल जाती हैं, मन और मौन पढ़ना हर कोई नहीं जानता l खटखटाते पुकारते हुए ख्वाहिशें आ ही जाती हैं, रूह को सुनना हर कोई नहीं जानता l दूसरों पर तो दुनिया बहुत कुछ लिख जाती है, दिल के राज लिखना कोई नहीं चाहता l "मोरनी"
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  • निकाल वक़्त इस ज़माने से
    आजा मिलते हैं किसी बहाने से
    वेद तो दुनिया पढ़ती है
    आजा वेदना पढ़ते हैं इस बहाने से
    फंस गए हैं जिंदगी के कुरुक्षेत्र में
    आजा मैदान में आते हैं इक बहाने से
    टेंशन ले ले कर थक गए हैं
    आजा दुःखी शक़्ल पर ख़ुशी सजाते हैं इस बहाने से l
    "मोरनी"
    निकाल वक़्त इस ज़माने से आजा मिलते हैं किसी बहाने से वेद तो दुनिया पढ़ती है आजा वेदना पढ़ते हैं इस बहाने से फंस गए हैं जिंदगी के कुरुक्षेत्र में आजा मैदान में आते हैं इक बहाने से टेंशन ले ले कर थक गए हैं आजा दुःखी शक़्ल पर ख़ुशी सजाते हैं इस बहाने से l "मोरनी"
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