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  • थोड़ा सोचूँ फ़िर एक बात लिखूँ
    ज़ज्बात लिखूँ या हालात लिखूँ
    तेरे इश्क़ को अपने साथ लिखूँ
    या मेरे हाथों में तेरा हाथ लिखूँ
    तुझे देखूँ फ़िर तेरी बात लिखूँ
    तारीफ़ लिखूँ या फ़रियाद लिखूँ
    तेरे पिछे ख़ुद को आबाद लिखूँ
    या तन्हाई में खुद को बर्बाद लिखूँ
    तुझे दिन या ख़ुद को रात लिखूँ
    बता आज कौनसी बात लिखूँ l
    "मोरनी"
    थोड़ा सोचूँ फ़िर एक बात लिखूँ ज़ज्बात लिखूँ या हालात लिखूँ तेरे इश्क़ को अपने साथ लिखूँ या मेरे हाथों में तेरा हाथ लिखूँ तुझे देखूँ फ़िर तेरी बात लिखूँ तारीफ़ लिखूँ या फ़रियाद लिखूँ तेरे पिछे ख़ुद को आबाद लिखूँ या तन्हाई में खुद को बर्बाद लिखूँ तुझे दिन या ख़ुद को रात लिखूँ बता आज कौनसी बात लिखूँ l "मोरनी"
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  • मरहम जैसे लग रहे हैं आप
    महरम(who keeps secret)जैसे लग रहे हैं आप
    दुश्मन जैसी इस दुनिया में
    दोस्त जैसे लग रहे हैं आप
    मुझ पर अनवरत बरस रही
    शबनम जैसे लग रहे हैं आप
    जैसे ख़्वाबों में मैंने सोचा था
    एकदम वैसे लग रहे हैं आप
    "मोरनी"
    मरहम जैसे लग रहे हैं आप महरम(who keeps secret)जैसे लग रहे हैं आप दुश्मन जैसी इस दुनिया में दोस्त जैसे लग रहे हैं आप मुझ पर अनवरत बरस रही शबनम जैसे लग रहे हैं आप जैसे ख़्वाबों में मैंने सोचा था एकदम वैसे लग रहे हैं आप "मोरनी"
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  • जो अच्छा लगे वही करें
    दुनिया की परवाह किए बग़ैर
    जो अच्छा लगे वही करें
    ख़ुद को गुमराह किए बग़ैर
    जो अच्छा लगे वही करें
    अंजाम की फ़िक्र किए बग़ैर
    जो अच्छा लगे वही करें
    दूसरों से सलाह लिए बग़ैर l
    "मोरनी"
    जो अच्छा लगे वही करें दुनिया की परवाह किए बग़ैर जो अच्छा लगे वही करें ख़ुद को गुमराह किए बग़ैर जो अच्छा लगे वही करें अंजाम की फ़िक्र किए बग़ैर जो अच्छा लगे वही करें दूसरों से सलाह लिए बग़ैर l "मोरनी"
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  • लिख लिख कर रख रही हूँ
    यानी बोलने से बच रही हूँ
    तुम कुछ समझ नहीं रहे हो
    मैं आसानी से समझा रही हूँ
    कभी तुम नजरें उठा रहे हो
    कभी मैं नजरें झुका रही हूँ
    इशारों ही इशारों में तुम
    कई पहेलियाँ बुझा रहे हो l
    "मोरनी"
    लिख लिख कर रख रही हूँ यानी बोलने से बच रही हूँ तुम कुछ समझ नहीं रहे हो मैं आसानी से समझा रही हूँ कभी तुम नजरें उठा रहे हो कभी मैं नजरें झुका रही हूँ इशारों ही इशारों में तुम कई पहेलियाँ बुझा रहे हो l "मोरनी"
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  • रिश्तों में खटास में पङ रही है
    दौलत की प्यास बढ़ रही है
    सास बहू से लङ रही है
    बहू सास से लङ रही है
    बेटे को दो दिन लगेंगे विदेश से आने में
    गांव में बुढ़ी माँ की लाश सङ रही है
    ज़रूरत जमींदोज़ हो चुकी है
    ख़्वाहिश आकाश चढ़ रही है
    मैं उसे विनाश लिख रही हूँ
    दुनिया जिसे विकास पढ़ रही है l
    "मोरनी"
    रिश्तों में खटास में पङ रही है दौलत की प्यास बढ़ रही है सास बहू से लङ रही है बहू सास से लङ रही है बेटे को दो दिन लगेंगे विदेश से आने में गांव में बुढ़ी माँ की लाश सङ रही है ज़रूरत जमींदोज़ हो चुकी है ख़्वाहिश आकाश चढ़ रही है मैं उसे विनाश लिख रही हूँ दुनिया जिसे विकास पढ़ रही है l "मोरनी"
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  • अस्थिर हो गयी है ज़िंदगी
    मुसाफ़िर हो गयी है ज़िंदगी
    ख्वाहिशों के जाल से
    घिर गयी है ज़िंदगी
    सुकून बग़ैर जीने में
    माहिर हो गयी है ज़िंदगी
    सबके दाम बढ़ गए हैं
    मग़र गिर गयी है ज़िंदगी
    जज़्बातों के मर जाने से
    काफ़िर हो गयी है ज़िंदगी l
    "मोरनी"
    अस्थिर हो गयी है ज़िंदगी मुसाफ़िर हो गयी है ज़िंदगी ख्वाहिशों के जाल से घिर गयी है ज़िंदगी सुकून बग़ैर जीने में माहिर हो गयी है ज़िंदगी सबके दाम बढ़ गए हैं मग़र गिर गयी है ज़िंदगी जज़्बातों के मर जाने से काफ़िर हो गयी है ज़िंदगी l "मोरनी"
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  • बेशक रात अंधेरी है
    रातों की वो पहरी है
    मैं टूटा तारा ढूंढ रही हूँ
    अधूरी ख़्वाहिश मेरी है
    चाँद साथ हो तो बात बने
    एक बात लबों पर ठहरी है
    कौन समझे दुःख दर्द मेरे
    दुनिया तो अंधी बहरी है
    तन्हाई मेरी सहेली है
    महफ़िल मेरी बैरी है l
    "मोरनी"
    बेशक रात अंधेरी है रातों की वो पहरी है मैं टूटा तारा ढूंढ रही हूँ अधूरी ख़्वाहिश मेरी है चाँद साथ हो तो बात बने एक बात लबों पर ठहरी है कौन समझे दुःख दर्द मेरे दुनिया तो अंधी बहरी है तन्हाई मेरी सहेली है महफ़िल मेरी बैरी है l "मोरनी"
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  • ज़िंदगी हम सभी की बड़ी सूनी है
    इसलिए आँखें बहुत बातूनी हैं
    फागुन का मौसम आता है
    यादों की हवाओं में रंगीनी है
    आवाज़ तक नहीं निकलती
    दर्द इस कदर अंदरूनी है
    लोग रंग बदल चुके हैं
    होली अब इतनी बौनी है
    सुकून की अदालत में अब
    ख्वाहिशें गैर कानूनी हैं
    "मोरनी"
    ज़िंदगी हम सभी की बड़ी सूनी है इसलिए आँखें बहुत बातूनी हैं फागुन का मौसम आता है यादों की हवाओं में रंगीनी है आवाज़ तक नहीं निकलती दर्द इस कदर अंदरूनी है लोग रंग बदल चुके हैं होली अब इतनी बौनी है सुकून की अदालत में अब ख्वाहिशें गैर कानूनी हैं "मोरनी"
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  • मेरे शब्दों में जान डाल दो ना
    सुर के साथ थोड़ा ताल दो ना
    कलम मेरी लड़खड़ा रही है
    आवाज़ देकर सम्भाल लो ना
    किताबों में दबे दबे घुटन हो रही है
    दम घुटने के पहले शब्द निकाल लो ना
    आपके आगे क्या मिसाल पेश करूँ
    आप अपने आप में बेमिसाल हो ना
    हमने तो नाम तक भी छुपा कर रखा
    आप उसी नाम से हमें पुकार लो ना l
    "मोरनी "
    मेरे शब्दों में जान डाल दो ना सुर के साथ थोड़ा ताल दो ना कलम मेरी लड़खड़ा रही है आवाज़ देकर सम्भाल लो ना किताबों में दबे दबे घुटन हो रही है दम घुटने के पहले शब्द निकाल लो ना आपके आगे क्या मिसाल पेश करूँ आप अपने आप में बेमिसाल हो ना हमने तो नाम तक भी छुपा कर रखा आप उसी नाम से हमें पुकार लो ना l "मोरनी "
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  • सिर्फ़ तुम पर लिखना चाहती हूँ
    और बेह्तरीन लिखना चाहती हूँ
    दिल वालों को ही सुनाई दे
    उस धुन पर लिखना चाहती हूँ
    देखकर तो बड़ा लिख लिया
    अब सुनकर लिखना चाहती हूँ
    जितने भी दिल में राज छुपे हैं
    उन सबको लिखना चाहती हूँ
    तुमसे सदा मेरी बनी रहे
    मैं इश्क़ को लिखना चाहती हूँ
    "मोरनी"
    सिर्फ़ तुम पर लिखना चाहती हूँ और बेह्तरीन लिखना चाहती हूँ दिल वालों को ही सुनाई दे उस धुन पर लिखना चाहती हूँ देखकर तो बड़ा लिख लिया अब सुनकर लिखना चाहती हूँ जितने भी दिल में राज छुपे हैं उन सबको लिखना चाहती हूँ तुमसे सदा मेरी बनी रहे मैं इश्क़ को लिखना चाहती हूँ "मोरनी"
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