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ज़िंदगी हम सभी की बड़ी सूनी है
इसलिए आँखें बहुत बातूनी हैं
फागुन का मौसम आता है
यादों की हवाओं में रंगीनी है
आवाज़ तक नहीं निकलती
दर्द इस कदर अंदरूनी है
लोग रंग बदल चुके हैं
होली अब इतनी बौनी है
सुकून की अदालत में अब
ख्वाहिशें गैर कानूनी हैं
"मोरनी"
ज़िंदगी हम सभी की बड़ी सूनी है इसलिए आँखें बहुत बातूनी हैं फागुन का मौसम आता है यादों की हवाओं में रंगीनी है आवाज़ तक नहीं निकलती दर्द इस कदर अंदरूनी है लोग रंग बदल चुके हैं होली अब इतनी बौनी है सुकून की अदालत में अब ख्वाहिशें गैर कानूनी हैं "मोरनी"
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