अहम को खरा भी खोटा नज़र आता है
कीड़े को आक भी बरगद नज़र आता है
अकल से अपाहिज का दोष कोई नहीं
क्यूँकि दूर से और ग़ुरूर से हर कोई छोटा नज़र आता है l
कीड़े को आक भी बरगद नज़र आता है
अकल से अपाहिज का दोष कोई नहीं
क्यूँकि दूर से और ग़ुरूर से हर कोई छोटा नज़र आता है l
अहम को खरा भी खोटा नज़र आता है
कीड़े को आक भी बरगद नज़र आता है
अकल से अपाहिज का दोष कोई नहीं
क्यूँकि दूर से और ग़ुरूर से हर कोई छोटा नज़र आता है l
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