Sponsored
या तर्क कर या तकरार कर
जो भी है इज़हार कर
दिल को दिल और दिमाग़ को दिमाग़ रहने दे
पासे एक कर या नफ़रत कर या प्यार कर
मुँह पर और पीठ पीछे और
क्यूँ रखता है मन में चोर
इस चोर का भोरा नी ज़ोर
ऐसे ही करता है मन कमज़ोर
दो कर बेशक चार कर
गिनती तेरी है बेशक हज़ार कर
पर पासे एक कर
नफ़रत कर या प्यार कर l
"मोरनी"
या तर्क कर या तकरार कर जो भी है इज़हार कर दिल को दिल और दिमाग़ को दिमाग़ रहने दे पासे एक कर या नफ़रत कर या प्यार कर मुँह पर और पीठ पीछे और क्यूँ रखता है मन में चोर इस चोर का भोरा नी ज़ोर ऐसे ही करता है मन कमज़ोर दो कर बेशक चार कर गिनती तेरी है बेशक हज़ार कर पर पासे एक कर नफ़रत कर या प्यार कर l "मोरनी"
0 Comments 0 Shares 30 Views
Sponsored