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  • सुकूं से इश्क़ कर बैठी हूँ
    अब नहीं भाता कुछ और
    शोर शराबों से दूर रहती हूँ
    अब तन्हाई पसन्द है
    भीड़ से सिहरन में रहती हूँ
    इस ख़ामोशी में कुछ तो बात है
    जो ग़मों को कुछ कम सहती हूँ
    ख़ुद को ख़ुद का अज़ीज़ बना रखा है
    हाँ सुकूं से इश्क़ कर रखा है l
    "मोरनी"
    सुकूं से इश्क़ कर बैठी हूँ अब नहीं भाता कुछ और शोर शराबों से दूर रहती हूँ अब तन्हाई पसन्द है भीड़ से सिहरन में रहती हूँ इस ख़ामोशी में कुछ तो बात है जो ग़मों को कुछ कम सहती हूँ ख़ुद को ख़ुद का अज़ीज़ बना रखा है हाँ सुकूं से इश्क़ कर रखा है l "मोरनी"
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  • कांपते होंठ
    धुंधला सवेरा
    रातें लम्बी गिरती ओस,
    और धूप ग़ायब है
    सर्दियाँ बढ़ चुकी हैं,
    सुबह का आलम
    चाय का कप और
    अख़बार की सुर्खियाँ
    कि छुट्टियाँ बढ़ चुकी हैं l

    "मोरनी"
    कांपते होंठ धुंधला सवेरा रातें लम्बी गिरती ओस, और धूप ग़ायब है सर्दियाँ बढ़ चुकी हैं, सुबह का आलम चाय का कप और अख़बार की सुर्खियाँ कि छुट्टियाँ बढ़ चुकी हैं l 😍😜 "मोरनी"
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  • अगर जिंदा हो तो खुद से सवाल करो
    मरने से पहले मत मरो
    ज़िन्दगी का कुछ तो ख्याल करो
    ये बालों में सफ़ेदी एकदम से थोड़ी आती है
    हर जाती हुई रात तुमसे चुटकी भर ज़िन्दगी वापिस ले जाती है
    जैसे साँस छोड़ी और गया एक पल
    फ़िर वो पल पहर में पहर दिन में और दिन साल में गया बदल
    जानती हूँ के तुम घर के माली हो
    इसलिए सारे काम करो सारे फ़र्ज निभाओ
    पर पहले ख़ुद को थोड़ा पानी दो
    ख़ुद को इतना भी मत सुखाओ
    ज़िंदगी का कुछ तो ख्याल करो
    मरने से पहले मत मरो l
    "मोरनी"
    अगर जिंदा हो तो खुद से सवाल करो मरने से पहले मत मरो ज़िन्दगी का कुछ तो ख्याल करो ये बालों में सफ़ेदी एकदम से थोड़ी आती है हर जाती हुई रात तुमसे चुटकी भर ज़िन्दगी वापिस ले जाती है जैसे साँस छोड़ी और गया एक पल फ़िर वो पल पहर में पहर दिन में और दिन साल में गया बदल जानती हूँ के तुम घर के माली हो इसलिए सारे काम करो सारे फ़र्ज निभाओ पर पहले ख़ुद को थोड़ा पानी दो ख़ुद को इतना भी मत सुखाओ ज़िंदगी का कुछ तो ख्याल करो मरने से पहले मत मरो l "मोरनी"
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  • ਗੱਲ ਕਰਨ ਨੂੰ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ
    ਕਿ ਐ ਕੋਈ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ
    ਤੇਰੀ ਮੇਰੀ ਚੁੱਪ ਨਿ ਟੁੱਟ ਰਹੀ
    ਤੁ ਕਹਨਾ ਕੋਈ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ
    ਗੁੱਸਾ ਪਲ ਦੋ ਪਲ ਹੁੰਦਾ
    ਪਿਆਰ ਚ ਰੋਸਾ ਚੱਲਦਾ ਹੁੰਦਾ
    ਬਿਨ ਝਗੜੇ ਰਿਸ਼ਤਾ ਵਾਜਿਬ ਨੀ
    ਪਰ ਝਗੜੇ ਦਾ ਕੋਈ ਹੱਲ ਤਾਂ ਹੁੰਦਾ
    ਹਲ ਕਰਨ ਨੂੰ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ
    ਕੀ ਐ ਕੋਈ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ
    ਸ਼ਿਕਵੇ ਸ਼ਿਕਾਇਤਾਂ ਕਰ ਲੈਂਦੇ ਹਾਂ
    ਆਜਾ ਮਿਲ ਕੇ ਲੜ ਲੈਂਦੇ ਹਾਂ
    ਦੋ ਚਾਰ ਜੁਬਾਨੀ ਗੱਲਾਂ ਦੇ ਨਾਲ
    ਮਨ ਨੂੰ ਹੋਲਾ ਕਰ ਲੈਂਦੇ ਹਾਂ
    ਆਜਾ ਮਿਲ ਕੇ ਲੜ ਲੈਂਦੇ ਹਾਂ
    ਤੇ ਸਾਰੇ ਮਸਲੇ ਹੱਲ ਕਰ ਲੈਂਦੇ ਹਾਂ
    ਸਾਡਾ ਐਸਾ ਕੋਈ ਪਲ ਨਹੀਂ ਹੈ
    ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਤੇਰੀ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ
    ਪਰ ਐ ਤੇ ਕੋਈ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ
    ਕਿ ਗੱਲ ਕਰਨ ਨੂੰ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ l
    " ਮੋਰਨੀ मोरनी"
    ਗੱਲ ਕਰਨ ਨੂੰ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕਿ ਐ ਕੋਈ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ ਤੇਰੀ ਮੇਰੀ ਚੁੱਪ ਨਿ ਟੁੱਟ ਰਹੀ ਤੁ ਕਹਨਾ ਕੋਈ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ ਗੁੱਸਾ ਪਲ ਦੋ ਪਲ ਹੁੰਦਾ ਪਿਆਰ ਚ ਰੋਸਾ ਚੱਲਦਾ ਹੁੰਦਾ ਬਿਨ ਝਗੜੇ ਰਿਸ਼ਤਾ ਵਾਜਿਬ ਨੀ ਪਰ ਝਗੜੇ ਦਾ ਕੋਈ ਹੱਲ ਤਾਂ ਹੁੰਦਾ ਹਲ ਕਰਨ ਨੂੰ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕੀ ਐ ਕੋਈ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ ਸ਼ਿਕਵੇ ਸ਼ਿਕਾਇਤਾਂ ਕਰ ਲੈਂਦੇ ਹਾਂ ਆਜਾ ਮਿਲ ਕੇ ਲੜ ਲੈਂਦੇ ਹਾਂ ਦੋ ਚਾਰ ਜੁਬਾਨੀ ਗੱਲਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਮਨ ਨੂੰ ਹੋਲਾ ਕਰ ਲੈਂਦੇ ਹਾਂ ਆਜਾ ਮਿਲ ਕੇ ਲੜ ਲੈਂਦੇ ਹਾਂ ਤੇ ਸਾਰੇ ਮਸਲੇ ਹੱਲ ਕਰ ਲੈਂਦੇ ਹਾਂ ਸਾਡਾ ਐਸਾ ਕੋਈ ਪਲ ਨਹੀਂ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਤੇਰੀ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ ਪਰ ਐ ਤੇ ਕੋਈ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕਿ ਗੱਲ ਕਰਨ ਨੂੰ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ l " ਮੋਰਨੀ मोरनी"
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  • पीली ओढ़ चुनरिया आया
    धरती ने ये आंगन सजाया
    फैला खुशियों का उजियारा
    मौसम सर्द बसंत से हारा
    वर्षा को भी संग ये लाया
    कोयल की कुहू कुहू से मन भरमाया
    हर पत्ता है पुलकित पुलकित
    फूलों ने भी गीत है गाया
    माँ ने भी वीणा है बजाई
    शिक्षा की ये अलख जगाई
    रंग बिरंगी पतंगें आई
    आसमान में हैं सब छाई
    करो शरद को विदा तुम आज
    होगा अब बसंत का आगाज l
    "मोरनी"

    पीली ओढ़ चुनरिया आया धरती ने ये आंगन सजाया फैला खुशियों का उजियारा मौसम सर्द बसंत से हारा वर्षा को भी संग ये लाया कोयल की कुहू कुहू से मन भरमाया हर पत्ता है पुलकित पुलकित फूलों ने भी गीत है गाया माँ ने भी वीणा है बजाई शिक्षा की ये अलख जगाई रंग बिरंगी पतंगें आई आसमान में हैं सब छाई करो शरद को विदा तुम आज होगा अब बसंत का आगाज l "मोरनी"
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  • रात में बिस्तर पर
    जब नींद दूर हो
    आता है एक ख्याल
    ज़िंदगी का...
    कहां जा रहे हैं?
    क्यों जा रहे हैं?
    कुछ पाएंगे?
    कुछ कर पाएंगे?
    बस दिल और दिमाग की
    इसी कशमकश में
    नींद कब आ जाती है
    पता ही नहीं चलता
    और सुबह... फिर वही...
    "मोरनी"
    रात में बिस्तर पर जब नींद दूर हो आता है एक ख्याल ज़िंदगी का... कहां जा रहे हैं? क्यों जा रहे हैं? कुछ पाएंगे? कुछ कर पाएंगे? बस दिल और दिमाग की इसी कशमकश में नींद कब आ जाती है पता ही नहीं चलता और सुबह... फिर वही... "मोरनी"
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  • दीवार में एक खिड़की रहती थी
    जाने वो मुझसे क्या कहती थी
    उस पर बैठी घन्टों निहारती
    वो चांद वो तारे और वो खूबसूरत आसमां
    फ़िर पकड़ती किसी पुस्तक का पन्ना
    और पन्ने से करती ढेरों बातें
    शब्द कम होते और अर्थ गहरे
    गहराई में होती एक तहज़ीब
    फ़िर कोई चुपके से पास आकर बैठ जाता
    करता कोशिश हर अल्फाज़ को समझने की
    और मैं करती जद्दोजहद ख़ुद को जानने की
    "मोरनी"
    दीवार में एक खिड़की रहती थी जाने वो मुझसे क्या कहती थी उस पर बैठी घन्टों निहारती वो चांद वो तारे और वो खूबसूरत आसमां फ़िर पकड़ती किसी पुस्तक का पन्ना और पन्ने से करती ढेरों बातें शब्द कम होते और अर्थ गहरे गहराई में होती एक तहज़ीब फ़िर कोई चुपके से पास आकर बैठ जाता करता कोशिश हर अल्फाज़ को समझने की और मैं करती जद्दोजहद ख़ुद को जानने की "मोरनी"
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  • जो बीत गयी सो बीत गयी
    जीवन की नयी कहानी अब
    काम की डायरी बंद हुई
    एक नयी किताब खुली है अब
    सालों की मेहनत पसीने की खुशबु
    सम्मान बनकर महकी है अब
    स्कूल की भागमभाग नहीं
    एक चाय इत्मिनान की अब
    कल तक जो शख्स सबका था
    ग़ुरूर से खुद का हो गया अब
    सपनों को फिर से जीने को
    एक नया सफ़र शुरू हो गया अब
    किया कर्म पूरा मुस्कान के साथ
    जिंदगी को खुलकर गुनगुनाना है अब l
    "मोरनी"

    For a colleague's retirement 🙏🏻

    जो बीत गयी सो बीत गयी जीवन की नयी कहानी अब काम की डायरी बंद हुई एक नयी किताब खुली है अब सालों की मेहनत पसीने की खुशबु सम्मान बनकर महकी है अब स्कूल की भागमभाग नहीं एक चाय इत्मिनान की अब कल तक जो शख्स सबका था ग़ुरूर से खुद का हो गया अब सपनों को फिर से जीने को एक नया सफ़र शुरू हो गया अब किया कर्म पूरा मुस्कान के साथ जिंदगी को खुलकर गुनगुनाना है अब l "मोरनी" For a colleague's retirement 🙏🏻
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  • बनाया है मैंने ये घर धीरे धीरे
    खुले मेरे ख्वाबों के पर धीरे धीरे
    किसी को गिराया ना ख़ुद को उछाला
    कटा ज़िंदगी का सफ़र धीरे धीरे
    जहाँ आप पहुंचे छलांगें लगाकर
    वहां मैं भी पहुंची मग़र धीरे धीरे
    गिरी मैं कहीं तो अकेले में रोई
    गया दर्द से घाव भर धीरे धीरे
    मिला क्या न मुझको ए दुनिया तुम्हारी
    मुहब्बत मिली मग़र धीरे धीरे
    किसी को गिराया ना ख़ुद को उछाला
    कटा ज़िन्दगी का सफ़र धीरे धीरे l
    "मोरनी"
    बनाया है मैंने ये घर धीरे धीरे खुले मेरे ख्वाबों के पर धीरे धीरे किसी को गिराया ना ख़ुद को उछाला कटा ज़िंदगी का सफ़र धीरे धीरे जहाँ आप पहुंचे छलांगें लगाकर वहां मैं भी पहुंची मग़र धीरे धीरे गिरी मैं कहीं तो अकेले में रोई गया दर्द से घाव भर धीरे धीरे मिला क्या न मुझको ए दुनिया तुम्हारी मुहब्बत मिली मग़र धीरे धीरे किसी को गिराया ना ख़ुद को उछाला कटा ज़िन्दगी का सफ़र धीरे धीरे l "मोरनी"
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  • जाने क्यों...
    इंसान दूसरे की उड़ान देखकर
    अपने ही पंख गिनने लग जाता है
    वो भूल जाता है कि
    आसमां तो सबका साँझा होता है
    मैं करती हूँ कोशिश हर शख्स से जुड़ने की
    लेकिन कईयों को इससे भी रश्क (Jealousy) होता है
    माना कि हुनर है सब में जुदा जुदा
    पर हर कोई ख़ुदा तो नहीं होता है
    गर करूँ बयां ख़ुद को एक खुली किताब बनकर
    तो ज़ाहिर है किताब का कोई महरम(relative)नहीं होता है l
    "मोरनी"





    जाने क्यों... इंसान दूसरे की उड़ान देखकर अपने ही पंख गिनने लग जाता है वो भूल जाता है कि आसमां तो सबका साँझा होता है मैं करती हूँ कोशिश हर शख्स से जुड़ने की लेकिन कईयों को इससे भी रश्क (Jealousy) होता है माना कि हुनर है सब में जुदा जुदा पर हर कोई ख़ुदा तो नहीं होता है गर करूँ बयां ख़ुद को एक खुली किताब बनकर तो ज़ाहिर है किताब का कोई महरम(relative)नहीं होता है l "मोरनी"
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