रात में बिस्तर पर
जब नींद दूर हो
आता है एक ख्याल
ज़िंदगी का...
कहां जा रहे हैं?
क्यों जा रहे हैं?
कुछ पाएंगे?
कुछ कर पाएंगे?
बस दिल और दिमाग की
इसी कशमकश में
नींद कब आ जाती है
पता ही नहीं चलता
और सुबह... फिर वही...
"मोरनी"
जब नींद दूर हो
आता है एक ख्याल
ज़िंदगी का...
कहां जा रहे हैं?
क्यों जा रहे हैं?
कुछ पाएंगे?
कुछ कर पाएंगे?
बस दिल और दिमाग की
इसी कशमकश में
नींद कब आ जाती है
पता ही नहीं चलता
और सुबह... फिर वही...
"मोरनी"
रात में बिस्तर पर
जब नींद दूर हो
आता है एक ख्याल
ज़िंदगी का...
कहां जा रहे हैं?
क्यों जा रहे हैं?
कुछ पाएंगे?
कुछ कर पाएंगे?
बस दिल और दिमाग की
इसी कशमकश में
नींद कब आ जाती है
पता ही नहीं चलता
और सुबह... फिर वही...
"मोरनी"