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  • कमरा,
    खिड़की,
    दीवार,
    दीवार पर पड़ती हल्की धूप,
    कमरे में बजते पसंद के गाने,
    एक आधी पढ़ी किताब,
    कुछ धुंधली यादें,
    कुछ अनकही शिकायतें
    बस...
    "मोरनी"
    कमरा, खिड़की, दीवार, दीवार पर पड़ती हल्की धूप, कमरे में बजते पसंद के गाने, एक आधी पढ़ी किताब, कुछ धुंधली यादें, कुछ अनकही शिकायतें बस... "मोरनी"
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  • कुछ पल चाहती हूँ
    सिर्फ़ मेरे लिए l
    कुछ पल..
    जो आज़ाद हों
    जिम्मेदारियों से
    मर्यादाओं से l
    कुछ पल जिन पर बस
    मेरा हक़ हो
    मेरी मर्ज़ी हो
    कुछ पल जिनमें
    मैं दिल खोलकर हंस सकूं
    जी भर के रो सकूं l
    कुछ पल..
    जो सही गलत से परे हों
    कुछ पल बस सुकून भरे हों l
    "मोरनी"
    कुछ पल चाहती हूँ सिर्फ़ मेरे लिए l कुछ पल.. जो आज़ाद हों जिम्मेदारियों से मर्यादाओं से l कुछ पल जिन पर बस मेरा हक़ हो मेरी मर्ज़ी हो कुछ पल जिनमें मैं दिल खोलकर हंस सकूं जी भर के रो सकूं l कुछ पल.. जो सही गलत से परे हों कुछ पल बस सुकून भरे हों l "मोरनी"
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  • प्यारे कान्हा...
    तुम्हारा अहसास तुम्हारा साथ
    महज़ साया नहीं हमसाया है मेरा
    जो अंधेरों में भी है उजालों की तरह
    तुम नाहक परेशान हो कि मिले नहीं कभी हम
    जुदा हुए ही कब थे सदा से साथ ही तो हैं
    ख़ूबसूरत ख़्यालों की तरह...
    प्यारे कान्हा... तुम्हारा अहसास तुम्हारा साथ महज़ साया नहीं हमसाया है मेरा जो अंधेरों में भी है उजालों की तरह तुम नाहक परेशान हो कि मिले नहीं कभी हम जुदा हुए ही कब थे सदा से साथ ही तो हैं ख़ूबसूरत ख़्यालों की तरह...
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