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कुछ पल चाहती हूँ
सिर्फ़ मेरे लिए l
कुछ पल..
जो आज़ाद हों
जिम्मेदारियों से
मर्यादाओं से l
कुछ पल जिन पर बस
मेरा हक़ हो
मेरी मर्ज़ी हो
कुछ पल जिनमें
मैं दिल खोलकर हंस सकूं
जी भर के रो सकूं l
कुछ पल..
जो सही गलत से परे हों
कुछ पल बस सुकून भरे हों l
"मोरनी"
कुछ पल चाहती हूँ सिर्फ़ मेरे लिए l कुछ पल.. जो आज़ाद हों जिम्मेदारियों से मर्यादाओं से l कुछ पल जिन पर बस मेरा हक़ हो मेरी मर्ज़ी हो कुछ पल जिनमें मैं दिल खोलकर हंस सकूं जी भर के रो सकूं l कुछ पल.. जो सही गलत से परे हों कुछ पल बस सुकून भरे हों l "मोरनी"
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