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प्यारे कान्हा...
तुम्हारा अहसास तुम्हारा साथ
महज़ साया नहीं हमसाया है मेरा
जो अंधेरों में भी है उजालों की तरह
तुम नाहक परेशान हो कि मिले नहीं कभी हम
जुदा हुए ही कब थे सदा से साथ ही तो हैं
ख़ूबसूरत ख़्यालों की तरह...
प्यारे कान्हा... तुम्हारा अहसास तुम्हारा साथ महज़ साया नहीं हमसाया है मेरा जो अंधेरों में भी है उजालों की तरह तुम नाहक परेशान हो कि मिले नहीं कभी हम जुदा हुए ही कब थे सदा से साथ ही तो हैं ख़ूबसूरत ख़्यालों की तरह...
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