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  • मैं शहर का शोर शराबा
    तुम गांव से शांत प्रिये
    मैं उलझा हुआ सा ख्वाब कोई
    तुम सुलझी हुई सी बात प्रिये
    मैं दोपहर की चिकचिक
    तुम सुकून भरी सी सुबह प्रिये
    मैं दूरियों का पैमाना
    तुम हसीन मुलाकात प्रिये
    मैं बिखरा हुआ सा ज़वाब तेरा
    तू सिमटा हुआ सवाल प्रिये
    मैं थोड़ी अलग इस दुनिया से
    मग़र मिलते हैं तुझसे ख़यालात प्रिये l
    "मोरनी"
    मैं शहर का शोर शराबा तुम गांव से शांत प्रिये मैं उलझा हुआ सा ख्वाब कोई तुम सुलझी हुई सी बात प्रिये मैं दोपहर की चिकचिक तुम सुकून भरी सी सुबह प्रिये मैं दूरियों का पैमाना तुम हसीन मुलाकात प्रिये मैं बिखरा हुआ सा ज़वाब तेरा तू सिमटा हुआ सवाल प्रिये मैं थोड़ी अलग इस दुनिया से मग़र मिलते हैं तुझसे ख़यालात प्रिये l "मोरनी"
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  • ज़िंदगी हम सभी की बड़ी सूनी है
    इसलिए आँखें बहुत बातूनी हैं
    फागुन का मौसम आता है
    यादों की हवाओं में रंगीनी है
    आवाज़ तक नहीं निकलती
    दर्द इस कदर अंदरूनी है
    लोग रंग बदल चुके हैं
    होली अब इतनी बौनी है
    सुकून की अदालत में अब
    ख्वाहिशें गैर कानूनी हैं
    "मोरनी"
    ज़िंदगी हम सभी की बड़ी सूनी है इसलिए आँखें बहुत बातूनी हैं फागुन का मौसम आता है यादों की हवाओं में रंगीनी है आवाज़ तक नहीं निकलती दर्द इस कदर अंदरूनी है लोग रंग बदल चुके हैं होली अब इतनी बौनी है सुकून की अदालत में अब ख्वाहिशें गैर कानूनी हैं "मोरनी"
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  • बेशक रात अंधेरी है
    रातों की वो पहरी है
    मैं टूटा तारा ढूंढ रही हूँ
    अधूरी ख़्वाहिश मेरी है
    चाँद साथ हो तो बात बने
    एक बात लबों पर ठहरी है
    कौन समझे दुःख दर्द मेरे
    दुनिया तो अंधी बहरी है
    तन्हाई मेरी सहेली है
    महफ़िल मेरी बैरी है l
    "मोरनी"
    बेशक रात अंधेरी है रातों की वो पहरी है मैं टूटा तारा ढूंढ रही हूँ अधूरी ख़्वाहिश मेरी है चाँद साथ हो तो बात बने एक बात लबों पर ठहरी है कौन समझे दुःख दर्द मेरे दुनिया तो अंधी बहरी है तन्हाई मेरी सहेली है महफ़िल मेरी बैरी है l "मोरनी"
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  • अस्थिर हो गयी है ज़िंदगी
    मुसाफ़िर हो गयी है ज़िंदगी
    ख्वाहिशों के जाल से
    घिर गयी है ज़िंदगी
    सुकून बग़ैर जीने में
    माहिर हो गयी है ज़िंदगी
    सबके दाम बढ़ गए हैं
    मग़र गिर गयी है ज़िंदगी
    जज़्बातों के मर जाने से
    काफ़िर हो गयी है ज़िंदगी l
    "मोरनी"
    अस्थिर हो गयी है ज़िंदगी मुसाफ़िर हो गयी है ज़िंदगी ख्वाहिशों के जाल से घिर गयी है ज़िंदगी सुकून बग़ैर जीने में माहिर हो गयी है ज़िंदगी सबके दाम बढ़ गए हैं मग़र गिर गयी है ज़िंदगी जज़्बातों के मर जाने से काफ़िर हो गयी है ज़िंदगी l "मोरनी"
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  • थोड़ा सोचूँ फ़िर एक बात लिखूँ
    ज़ज्बात लिखूँ या हालात लिखूँ
    तेरे इश्क़ को अपने साथ लिखूँ
    या मेरे हाथों में तेरा हाथ लिखूँ
    तुझे देखूँ फ़िर तेरी बात लिखूँ
    तारीफ़ लिखूँ या फ़रियाद लिखूँ
    तेरे पिछे ख़ुद को आबाद लिखूँ
    या तन्हाई में खुद को बर्बाद लिखूँ
    तुझे दिन या ख़ुद को रात लिखूँ
    बता आज कौनसी बात लिखूँ l
    "मोरनी"
    थोड़ा सोचूँ फ़िर एक बात लिखूँ ज़ज्बात लिखूँ या हालात लिखूँ तेरे इश्क़ को अपने साथ लिखूँ या मेरे हाथों में तेरा हाथ लिखूँ तुझे देखूँ फ़िर तेरी बात लिखूँ तारीफ़ लिखूँ या फ़रियाद लिखूँ तेरे पिछे ख़ुद को आबाद लिखूँ या तन्हाई में खुद को बर्बाद लिखूँ तुझे दिन या ख़ुद को रात लिखूँ बता आज कौनसी बात लिखूँ l "मोरनी"
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  • हम नये शहर में यादें पुरानी लिए बैठे हैं
    कुछ बिसरी बातें जुबानी लिए बैठे हैं
    चेहरे पर दर्द ओ गम की शिकन सी
    इन आँखों में हल्का सा पानी लिए बैठे हैं
    हर लम्हा बस उन्हीं चेहरों का तसव्वुर
    ये दिल दिमाग जिद्द बचकानी लिए बैठे हैं
    कई साल संग में रहे वो हमसफ़र
    और हम सालों को अब तक लिए बैठे हैं
    मेरे फसाने का ना पूछो तो अच्छा है
    हम तो ये सारी आफतें बेगानी लिए बैठे हैं l
    "मोरनी"
    हम नये शहर में यादें पुरानी लिए बैठे हैं कुछ बिसरी बातें जुबानी लिए बैठे हैं चेहरे पर दर्द ओ गम की शिकन सी इन आँखों में हल्का सा पानी लिए बैठे हैं हर लम्हा बस उन्हीं चेहरों का तसव्वुर ये दिल दिमाग जिद्द बचकानी लिए बैठे हैं कई साल संग में रहे वो हमसफ़र और हम सालों को अब तक लिए बैठे हैं मेरे फसाने का ना पूछो तो अच्छा है हम तो ये सारी आफतें बेगानी लिए बैठे हैं l "मोरनी"
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