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मैं शहर का शोर शराबा
तुम गांव से शांत प्रिये
मैं उलझा हुआ सा ख्वाब कोई
तुम सुलझी हुई सी बात प्रिये
मैं दोपहर की चिकचिक
तुम सुकून भरी सी सुबह प्रिये
मैं दूरियों का पैमाना
तुम हसीन मुलाकात प्रिये
मैं बिखरा हुआ सा ज़वाब तेरा
तू सिमटा हुआ सवाल प्रिये
मैं थोड़ी अलग इस दुनिया से
मग़र मिलते हैं तुझसे ख़यालात प्रिये l
"मोरनी"
मैं शहर का शोर शराबा तुम गांव से शांत प्रिये मैं उलझा हुआ सा ख्वाब कोई तुम सुलझी हुई सी बात प्रिये मैं दोपहर की चिकचिक तुम सुकून भरी सी सुबह प्रिये मैं दूरियों का पैमाना तुम हसीन मुलाकात प्रिये मैं बिखरा हुआ सा ज़वाब तेरा तू सिमटा हुआ सवाल प्रिये मैं थोड़ी अलग इस दुनिया से मग़र मिलते हैं तुझसे ख़यालात प्रिये l "मोरनी"
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