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  • In English i say...I love you.
    But in ਪੰਜਾਬੀ i say...
    ਮੇਰੇ ਦਿਲ ਦੀਆਂ ਤੇਰੇ ਦਿਲ ਨਾਲ ਟਕਰਾੰ ਨਾਲ ਮੁਹੱਬਤ ਹੈ
    ਤੇਰੇ ਨਾਂ ਦੇ ਜੁੜ ਬਣਦੇ ਉਹਨਾਂ ਅੱਖਰਾਂ ਨਾਲ ਮੁਹੱਬਤ ਹੈ
    ਤੇਰੇ ਪੈਰ ਨੂੰ ਛੁ ਗਈ ਜਿਹੜੀ ਉਹਨਾਂ ਆਬਾਂ ਨਾਲ ਮੁਹੱਬਤ ਹੈ
    ਜਿਹੜੇ ਖੁੱਲ੍ਹੀਆਂ ਅੱਖਾਂ ਵਿਚ ਨੇ ਖਵਾਬਾਂ ਨਾਲ ਮੁਹੱਬਤ ਹੈ
    ਜਿਹੜੀ ਤੈਨੂੰ ਤੱਕ ਕੇ ਬੁਝਈ ਉਹਨਾਂ ਪਿਆਸਾਂ ਨਾਲ ਮੁਹੱਬਤ ਹੈ
    ਜੋ ਤੈਨੂੰ ਮਹਿਸੂਸ ਕਰਾਂ ਐਹਸਾਸਾਂ ਨਾਲ ਮੁਹੱਬਤ ਹੈ
    ਤੇ ਜਿਹਦੇ ਵਿਚ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਮੰਗਾਂ ਅਰਦਾਸਾਂ ਨਾਲ ਮੁਹੱਬਤ ਹੈ l
    "ਮੋਰਨੀ"
    In English i say...I love you. But in ਪੰਜਾਬੀ i say... ਮੇਰੇ ਦਿਲ ਦੀਆਂ ਤੇਰੇ ਦਿਲ ਨਾਲ ਟਕਰਾੰ ਨਾਲ ਮੁਹੱਬਤ ਹੈ ਤੇਰੇ ਨਾਂ ਦੇ ਜੁੜ ਬਣਦੇ ਉਹਨਾਂ ਅੱਖਰਾਂ ਨਾਲ ਮੁਹੱਬਤ ਹੈ ਤੇਰੇ ਪੈਰ ਨੂੰ ਛੁ ਗਈ ਜਿਹੜੀ ਉਹਨਾਂ ਆਬਾਂ ਨਾਲ ਮੁਹੱਬਤ ਹੈ ਜਿਹੜੇ ਖੁੱਲ੍ਹੀਆਂ ਅੱਖਾਂ ਵਿਚ ਨੇ ਖਵਾਬਾਂ ਨਾਲ ਮੁਹੱਬਤ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਤੈਨੂੰ ਤੱਕ ਕੇ ਬੁਝਈ ਉਹਨਾਂ ਪਿਆਸਾਂ ਨਾਲ ਮੁਹੱਬਤ ਹੈ ਜੋ ਤੈਨੂੰ ਮਹਿਸੂਸ ਕਰਾਂ ਐਹਸਾਸਾਂ ਨਾਲ ਮੁਹੱਬਤ ਹੈ ਤੇ ਜਿਹਦੇ ਵਿਚ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਮੰਗਾਂ ਅਰਦਾਸਾਂ ਨਾਲ ਮੁਹੱਬਤ ਹੈ l "ਮੋਰਨੀ"
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  • कान्हा...
    क्यों चुंधिया जाती है मेरी नज़र
    सूरज तो नहीं हो तुम!

    क्यों शीतल हो जाता है मेरा मन
    चाँद तो नहीं हो तुम!

    क्यों चली आती है हंसी की लहर
    सागर तो नहीं हो तुम!

    क्यों असीम आनंद भर जाता है हृदय में
    आकाश तो नहीं हो तुम!

    क्यों इंतज़ार रहता है मुझे हर पल तुम्हारा
    मेरे तो नहीं हो तुम!!
    "मोरनी"
    कान्हा... क्यों चुंधिया जाती है मेरी नज़र सूरज तो नहीं हो तुम! क्यों शीतल हो जाता है मेरा मन चाँद तो नहीं हो तुम! क्यों चली आती है हंसी की लहर सागर तो नहीं हो तुम! क्यों असीम आनंद भर जाता है हृदय में आकाश तो नहीं हो तुम! क्यों इंतज़ार रहता है मुझे हर पल तुम्हारा मेरे तो नहीं हो तुम!! "मोरनी"
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  • इन दिनों मैं कुछ बदल रही हूँ
    मालूम नहीं कहाँ जाना है
    पर चल रही हूँ
    एक रास्ता जो तेरी छांव से दूर जाता है
    उसपे तपता सूरज है गरम रेत है
    और जल रही हूँ
    पर मैं चल रही हूँ
    तुझसे दूर निकल रही हूँ
    मैं तुझसे दूर निकल रही हूँ l
    "मोरनी"
    इन दिनों मैं कुछ बदल रही हूँ मालूम नहीं कहाँ जाना है पर चल रही हूँ एक रास्ता जो तेरी छांव से दूर जाता है उसपे तपता सूरज है गरम रेत है और जल रही हूँ पर मैं चल रही हूँ तुझसे दूर निकल रही हूँ मैं तुझसे दूर निकल रही हूँ l "मोरनी"
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  • बड़े बुजुर्गों से सीखा है
    मैंने तजुर्बों से सीखा है
    अंत में यहीं छोड़ना पड़ता है
    खाली हाथ लिए मुर्दों से सीखा है
    शरीर रूपी मशीन का क्या भरोसा
    टूटते हुए कलपुर्जों से सीखा है
    अच्छे लोगों से सब सीखते हैं
    मैंने तो सब बुरों से सीखा है
    दिमाग वाले सब दगाबाज़ हैं
    मैंने प्रेम करना बच्चों से सीखा है l
    "मोरनी"
    बड़े बुजुर्गों से सीखा है मैंने तजुर्बों से सीखा है अंत में यहीं छोड़ना पड़ता है खाली हाथ लिए मुर्दों से सीखा है शरीर रूपी मशीन का क्या भरोसा टूटते हुए कलपुर्जों से सीखा है अच्छे लोगों से सब सीखते हैं मैंने तो सब बुरों से सीखा है दिमाग वाले सब दगाबाज़ हैं मैंने प्रेम करना बच्चों से सीखा है l "मोरनी"
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  • उसके चेहरे पर पहुंच कर ठहरे हैं ll
    मेरे नैनों के उसके नैनों पर पहरे हैं ll

    कुछ सुनने को तैयार ही नहीं,
    मेरे दोनों नैना एकदम बहरे हैं ll

    देखने भर से नशा छा गया,
    उसके नैना इतने मदभरे हैं ll

    मेरे नैना सब-कुछ गवाही दे रहे हैं,
    उसके नैना हैं कि कोई कटघरे हैं ll

    इनकी गहराइयों में डूबता जा रहा हूँ,
    उसके नैनों के दरिया बहुत गहरे हैं ll
    "मोरनी"
    उसके चेहरे पर पहुंच कर ठहरे हैं ll मेरे नैनों के उसके नैनों पर पहरे हैं ll कुछ सुनने को तैयार ही नहीं, मेरे दोनों नैना एकदम बहरे हैं ll देखने भर से नशा छा गया, उसके नैना इतने मदभरे हैं ll मेरे नैना सब-कुछ गवाही दे रहे हैं, उसके नैना हैं कि कोई कटघरे हैं ll इनकी गहराइयों में डूबता जा रहा हूँ, उसके नैनों के दरिया बहुत गहरे हैं ll "मोरनी"
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  • ज़िन्दगी के पिंजरे में कैद,
    कुछ कहानियाँ मेरी भी हैं…

    तेरे परों में सुस्ताती थकी सी,
    ठिठकी उड़ान चिरैया तेरी भी है…

    सलाखों से उन्मुक्त हो जीवन,
    अभिलाषा तेरी भी है, मेरी भी है…

    बदलते हैं मौसम, बदलेगी तक़दीर,
    उम्मीद का दाना चुगते हैं हम दोनों…

    खामोशियों की नदी बहती है अभी,
    दर्द की लहर तेज़ है, गहरी भी है…

    पर देख—क्षितिज कहीं तो मुस्काता है,
    सुबह उजली और शाम सुनहरी भी है…
    "मोरनी"
    ज़िन्दगी के पिंजरे में कैद, कुछ कहानियाँ मेरी भी हैं… तेरे परों में सुस्ताती थकी सी, ठिठकी उड़ान चिरैया तेरी भी है… सलाखों से उन्मुक्त हो जीवन, अभिलाषा तेरी भी है, मेरी भी है… बदलते हैं मौसम, बदलेगी तक़दीर, उम्मीद का दाना चुगते हैं हम दोनों… खामोशियों की नदी बहती है अभी, दर्द की लहर तेज़ है, गहरी भी है… पर देख—क्षितिज कहीं तो मुस्काता है, सुबह उजली और शाम सुनहरी भी है… "मोरनी"
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  • किसने कहा आसान है ज़िंदगी
    मौत का बस सामान है ज़िंदगी
    सबक मिले ही नहीं किताबों में
    उन्हीं का ही इम्तिहान है ज़िंदगी
    मुक्कदर ने लिखी दर्द की दास्तानें
    उन सभी की पहचान है ज़िंदगी
    मैं सहरा-सहरा भटकती मुसाफ़िर
    पाँवों का मामूली निशान है ज़िंदगी
    तुझसे क्या गिला और कैसा शिकवा
    तू चार दिनों की मेहमान है ज़िंदगी ll
    "मोरनी"
    किसने कहा आसान है ज़िंदगी मौत का बस सामान है ज़िंदगी सबक मिले ही नहीं किताबों में उन्हीं का ही इम्तिहान है ज़िंदगी मुक्कदर ने लिखी दर्द की दास्तानें उन सभी की पहचान है ज़िंदगी मैं सहरा-सहरा भटकती मुसाफ़िर पाँवों का मामूली निशान है ज़िंदगी तुझसे क्या गिला और कैसा शिकवा तू चार दिनों की मेहमान है ज़िंदगी ll "मोरनी"
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