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ज़िन्दगी के पिंजरे में कैद,
कुछ कहानियाँ मेरी भी हैं…

तेरे परों में सुस्ताती थकी सी,
ठिठकी उड़ान चिरैया तेरी भी है…

सलाखों से उन्मुक्त हो जीवन,
अभिलाषा तेरी भी है, मेरी भी है…

बदलते हैं मौसम, बदलेगी तक़दीर,
उम्मीद का दाना चुगते हैं हम दोनों…

खामोशियों की नदी बहती है अभी,
दर्द की लहर तेज़ है, गहरी भी है…

पर देख—क्षितिज कहीं तो मुस्काता है,
सुबह उजली और शाम सुनहरी भी है…
"मोरनी"
ज़िन्दगी के पिंजरे में कैद, कुछ कहानियाँ मेरी भी हैं… तेरे परों में सुस्ताती थकी सी, ठिठकी उड़ान चिरैया तेरी भी है… सलाखों से उन्मुक्त हो जीवन, अभिलाषा तेरी भी है, मेरी भी है… बदलते हैं मौसम, बदलेगी तक़दीर, उम्मीद का दाना चुगते हैं हम दोनों… खामोशियों की नदी बहती है अभी, दर्द की लहर तेज़ है, गहरी भी है… पर देख—क्षितिज कहीं तो मुस्काता है, सुबह उजली और शाम सुनहरी भी है… "मोरनी"
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