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किसने कहा आसान है ज़िंदगी
मौत का बस सामान है ज़िंदगी
सबक मिले ही नहीं किताबों में
उन्हीं का ही इम्तिहान है ज़िंदगी
मुक्कदर ने लिखी दर्द की दास्तानें
उन सभी की पहचान है ज़िंदगी
मैं सहरा-सहरा भटकती मुसाफ़िर
पाँवों का मामूली निशान है ज़िंदगी
तुझसे क्या गिला और कैसा शिकवा
तू चार दिनों की मेहमान है ज़िंदगी ll
"मोरनी"
किसने कहा आसान है ज़िंदगी मौत का बस सामान है ज़िंदगी सबक मिले ही नहीं किताबों में उन्हीं का ही इम्तिहान है ज़िंदगी मुक्कदर ने लिखी दर्द की दास्तानें उन सभी की पहचान है ज़िंदगी मैं सहरा-सहरा भटकती मुसाफ़िर पाँवों का मामूली निशान है ज़िंदगी तुझसे क्या गिला और कैसा शिकवा तू चार दिनों की मेहमान है ज़िंदगी ll "मोरनी"
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