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  • मैं शहर का शोर शराबा
    तुम गांव से शांत प्रिये
    मैं उलझा हुआ सा ख्वाब कोई
    तुम सुलझी हुई सी बात प्रिये
    मैं दोपहर की चिकचिक
    तुम सुकून भरी सी सुबह प्रिये
    मैं दूरियों का पैमाना
    तुम हसीन मुलाकात प्रिये
    मैं बिखरा हुआ सा ज़वाब तेरा
    तू सिमटा हुआ सवाल प्रिये
    मैं थोड़ी अलग इस दुनिया से
    मग़र मिलते हैं तुझसे ख़यालात प्रिये l
    "मोरनी"
    मैं शहर का शोर शराबा तुम गांव से शांत प्रिये मैं उलझा हुआ सा ख्वाब कोई तुम सुलझी हुई सी बात प्रिये मैं दोपहर की चिकचिक तुम सुकून भरी सी सुबह प्रिये मैं दूरियों का पैमाना तुम हसीन मुलाकात प्रिये मैं बिखरा हुआ सा ज़वाब तेरा तू सिमटा हुआ सवाल प्रिये मैं थोड़ी अलग इस दुनिया से मग़र मिलते हैं तुझसे ख़यालात प्रिये l "मोरनी"
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  • मेरे शब्दों में जान डाल दो ना
    सुर के साथ थोड़ा ताल दो ना
    कलम मेरी लड़खड़ा रही है
    आवाज़ देकर सम्भाल लो ना
    किताबों में दबे दबे घुटन हो रही है
    दम घुटने के पहले शब्द निकाल लो ना
    आपके आगे क्या मिसाल पेश करूँ
    आप अपने आप में बेमिसाल हो ना
    हमने तो नाम तक भी छुपा कर रखा
    आप उसी नाम से हमें पुकार लो ना l
    "मोरनी "
    मेरे शब्दों में जान डाल दो ना सुर के साथ थोड़ा ताल दो ना कलम मेरी लड़खड़ा रही है आवाज़ देकर सम्भाल लो ना किताबों में दबे दबे घुटन हो रही है दम घुटने के पहले शब्द निकाल लो ना आपके आगे क्या मिसाल पेश करूँ आप अपने आप में बेमिसाल हो ना हमने तो नाम तक भी छुपा कर रखा आप उसी नाम से हमें पुकार लो ना l "मोरनी "
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  • बेशक रात अंधेरी है
    रातों की वो पहरी है
    मैं टूटा तारा ढूंढ रही हूँ
    अधूरी ख़्वाहिश मेरी है
    चाँद साथ हो तो बात बने
    एक बात लबों पर ठहरी है
    कौन समझे दुःख दर्द मेरे
    दुनिया तो अंधी बहरी है
    तन्हाई मेरी सहेली है
    महफ़िल मेरी बैरी है l
    "मोरनी"
    बेशक रात अंधेरी है रातों की वो पहरी है मैं टूटा तारा ढूंढ रही हूँ अधूरी ख़्वाहिश मेरी है चाँद साथ हो तो बात बने एक बात लबों पर ठहरी है कौन समझे दुःख दर्द मेरे दुनिया तो अंधी बहरी है तन्हाई मेरी सहेली है महफ़िल मेरी बैरी है l "मोरनी"
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  • रिश्तों में खटास में पङ रही है
    दौलत की प्यास बढ़ रही है
    सास बहू से लङ रही है
    बहू सास से लङ रही है
    बेटे को दो दिन लगेंगे विदेश से आने में
    गांव में बुढ़ी माँ की लाश सङ रही है
    ज़रूरत जमींदोज़ हो चुकी है
    ख़्वाहिश आकाश चढ़ रही है
    मैं उसे विनाश लिख रही हूँ
    दुनिया जिसे विकास पढ़ रही है l
    "मोरनी"
    रिश्तों में खटास में पङ रही है दौलत की प्यास बढ़ रही है सास बहू से लङ रही है बहू सास से लङ रही है बेटे को दो दिन लगेंगे विदेश से आने में गांव में बुढ़ी माँ की लाश सङ रही है ज़रूरत जमींदोज़ हो चुकी है ख़्वाहिश आकाश चढ़ रही है मैं उसे विनाश लिख रही हूँ दुनिया जिसे विकास पढ़ रही है l "मोरनी"
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  • निकाल वक़्त इस ज़माने से
    आजा मिलते हैं किसी बहाने से
    वेद तो दुनिया पढ़ती है
    आजा वेदना पढ़ते हैं इस बहाने से
    फंस गए हैं जिंदगी के कुरुक्षेत्र में
    आजा मैदान में आते हैं इक बहाने से
    टेंशन ले ले कर थक गए हैं
    आजा दुःखी शक़्ल पर ख़ुशी सजाते हैं इस बहाने से l
    "मोरनी"
    निकाल वक़्त इस ज़माने से आजा मिलते हैं किसी बहाने से वेद तो दुनिया पढ़ती है आजा वेदना पढ़ते हैं इस बहाने से फंस गए हैं जिंदगी के कुरुक्षेत्र में आजा मैदान में आते हैं इक बहाने से टेंशन ले ले कर थक गए हैं आजा दुःखी शक़्ल पर ख़ुशी सजाते हैं इस बहाने से l "मोरनी"
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  • कुछ ख़ामोशियां शब्दों से ज्यादा बोल जाती हैं,
    मन और मौन पढ़ना हर कोई नहीं जानता l
    खटखटाते पुकारते हुए ख्वाहिशें आ ही जाती हैं,
    रूह को सुनना हर कोई नहीं जानता l
    दूसरों पर तो दुनिया बहुत कुछ लिख जाती है,
    दिल के राज लिखना कोई नहीं चाहता l
    "मोरनी"
    कुछ ख़ामोशियां शब्दों से ज्यादा बोल जाती हैं, मन और मौन पढ़ना हर कोई नहीं जानता l खटखटाते पुकारते हुए ख्वाहिशें आ ही जाती हैं, रूह को सुनना हर कोई नहीं जानता l दूसरों पर तो दुनिया बहुत कुछ लिख जाती है, दिल के राज लिखना कोई नहीं चाहता l "मोरनी"
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