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  • मन के तिमिर को हरने वाला
    एक ऐसा दीप जला दो भगवन
    जीवन सफल बना भगवन
    अपना ना कोई किसी से रूठे
    अधूरा किसी का स्वप्न ना टूटे
    महका रहे खुशियों से आंगन
    अमन के पुष्प खिला दो भगवन
    स्वार्थ दिल से मिटा दो भगवन
    घर घर शुभ दिवाली मनवा दो भगवन ll
    "मोरनी"
    मन के तिमिर को हरने वाला एक ऐसा दीप जला दो भगवन जीवन सफल बना भगवन अपना ना कोई किसी से रूठे अधूरा किसी का स्वप्न ना टूटे महका रहे खुशियों से आंगन अमन के पुष्प खिला दो भगवन स्वार्थ दिल से मिटा दो भगवन घर घर शुभ दिवाली मनवा दो भगवन ll "मोरनी"
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  • खूब पढ़ो...
    इसलिए नहीं कि लोग तुम्हें ज्ञानी कहें
    पढ़ो ताकि तुम्हारे अंदर का शोर थमे
    सोच दूसरों से उधार ना लेनी पड़े
    यहां हर कोई बोलने को तैयार है
    तुम्हें हर बात का उत्तर देना ज़रूरी नहीं
    ज्ञान का असली अर्थ बहस जीतना नहीं
    बल्कि इतना स्पष्ट हो जाना कि बहस की ज़रूरत ही ना पड़े
    दुनिया को प्रभावित करने के लिए मत पढ़ो
    अपने भीतर ऐसी समझ जगाने के लिए पढ़ो
    जिसके बाद दुनिया कुछ भी कहे
    तुम भीतर से विचलित ना हो ll
    "मोरनी"
    खूब पढ़ो... इसलिए नहीं कि लोग तुम्हें ज्ञानी कहें पढ़ो ताकि तुम्हारे अंदर का शोर थमे सोच दूसरों से उधार ना लेनी पड़े यहां हर कोई बोलने को तैयार है तुम्हें हर बात का उत्तर देना ज़रूरी नहीं ज्ञान का असली अर्थ बहस जीतना नहीं बल्कि इतना स्पष्ट हो जाना कि बहस की ज़रूरत ही ना पड़े दुनिया को प्रभावित करने के लिए मत पढ़ो अपने भीतर ऐसी समझ जगाने के लिए पढ़ो जिसके बाद दुनिया कुछ भी कहे तुम भीतर से विचलित ना हो ll "मोरनी"
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  • किसने कहा आसान है ज़िंदगी
    मौत का बस सामान है ज़िंदगी
    सबक मिले ही नहीं किताबों में
    उन्हीं का ही इम्तिहान है ज़िंदगी
    मुक्कदर ने लिखी दर्द की दास्तानें
    उन सभी की पहचान है ज़िंदगी
    मैं सहरा-सहरा भटकती मुसाफ़िर
    पाँवों का मामूली निशान है ज़िंदगी
    तुझसे क्या गिला और कैसा शिकवा
    तू चार दिनों की मेहमान है ज़िंदगी ll
    "मोरनी"
    किसने कहा आसान है ज़िंदगी मौत का बस सामान है ज़िंदगी सबक मिले ही नहीं किताबों में उन्हीं का ही इम्तिहान है ज़िंदगी मुक्कदर ने लिखी दर्द की दास्तानें उन सभी की पहचान है ज़िंदगी मैं सहरा-सहरा भटकती मुसाफ़िर पाँवों का मामूली निशान है ज़िंदगी तुझसे क्या गिला और कैसा शिकवा तू चार दिनों की मेहमान है ज़िंदगी ll "मोरनी"
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  • उसके चेहरे पर पहुंच कर ठहरे हैं ll
    मेरे नैनों के उसके नैनों पर पहरे हैं ll

    कुछ सुनने को तैयार ही नहीं,
    मेरे दोनों नैना एकदम बहरे हैं ll

    देखने भर से नशा छा गया,
    उसके नैना इतने मदभरे हैं ll

    मेरे नैना सब-कुछ गवाही दे रहे हैं,
    उसके नैना हैं कि कोई कटघरे हैं ll

    इनकी गहराइयों में डूबता जा रहा हूँ,
    उसके नैनों के दरिया बहुत गहरे हैं ll
    "मोरनी"
    उसके चेहरे पर पहुंच कर ठहरे हैं ll मेरे नैनों के उसके नैनों पर पहरे हैं ll कुछ सुनने को तैयार ही नहीं, मेरे दोनों नैना एकदम बहरे हैं ll देखने भर से नशा छा गया, उसके नैना इतने मदभरे हैं ll मेरे नैना सब-कुछ गवाही दे रहे हैं, उसके नैना हैं कि कोई कटघरे हैं ll इनकी गहराइयों में डूबता जा रहा हूँ, उसके नैनों के दरिया बहुत गहरे हैं ll "मोरनी"
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  • बड़े बुजुर्गों से सीखा है
    मैंने तजुर्बों से सीखा है
    अंत में यहीं छोड़ना पड़ता है
    खाली हाथ लिए मुर्दों से सीखा है
    शरीर रूपी मशीन का क्या भरोसा
    टूटते हुए कलपुर्जों से सीखा है
    अच्छे लोगों से सब सीखते हैं
    मैंने तो सब बुरों से सीखा है
    दिमाग वाले सब दगाबाज़ हैं
    मैंने प्रेम करना बच्चों से सीखा है l
    "मोरनी"
    बड़े बुजुर्गों से सीखा है मैंने तजुर्बों से सीखा है अंत में यहीं छोड़ना पड़ता है खाली हाथ लिए मुर्दों से सीखा है शरीर रूपी मशीन का क्या भरोसा टूटते हुए कलपुर्जों से सीखा है अच्छे लोगों से सब सीखते हैं मैंने तो सब बुरों से सीखा है दिमाग वाले सब दगाबाज़ हैं मैंने प्रेम करना बच्चों से सीखा है l "मोरनी"
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  • मैं शहर का शोर शराबा
    तुम गांव से शांत प्रिये
    मैं उलझा हुआ सा ख्वाब कोई
    तुम सुलझी हुई सी बात प्रिये
    मैं दोपहर की चिकचिक
    तुम सुकून भरी सी सुबह प्रिये
    मैं दूरियों का पैमाना
    तुम हसीन मुलाकात प्रिये
    मैं बिखरा हुआ सा ज़वाब तेरा
    तू सिमटा हुआ सवाल प्रिये
    मैं थोड़ी अलग इस दुनिया से
    मग़र मिलते हैं तुझसे ख़यालात प्रिये l
    "मोरनी"
    मैं शहर का शोर शराबा तुम गांव से शांत प्रिये मैं उलझा हुआ सा ख्वाब कोई तुम सुलझी हुई सी बात प्रिये मैं दोपहर की चिकचिक तुम सुकून भरी सी सुबह प्रिये मैं दूरियों का पैमाना तुम हसीन मुलाकात प्रिये मैं बिखरा हुआ सा ज़वाब तेरा तू सिमटा हुआ सवाल प्रिये मैं थोड़ी अलग इस दुनिया से मग़र मिलते हैं तुझसे ख़यालात प्रिये l "मोरनी"
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