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  • एक दिन मैं समेट कर चल दूँगी
    अपनी रंग बिरंगी साड़ियां
    सब सहेजे गए चुन-चुन कर लिए दुपट्टे
    अच्छे बुरे वक्त की लिखी डायरियाँ
    सोने चाँदी के गहनें
    मन को बहलाने के लिए बनाई पेंटिंग
    लकड़ी के फ्रेम, बीस तरह की ब्रश
    रंग-बिरंगे धागे और घुंघरूं वाली लटकन
    दुनिया भर के नेलपेंट और लिपस्टिक से भरे डिब्बे
    शीशे पर चिपकी हुई बिंदिया।
    समेट कर चल दूंगी रसोई की सारी खुशबू अपनी हथेली में
    उठा कर चल पडूंगी सारी धरती अपने ही सिर
    पीतल की टोकनी के ज्यों
    अब बोलो क्या बचेगा तुम्हारा
    चार जोड़ी कपड़ों के सिवा इस घर में ?
    "मोरनी"
    एक दिन मैं समेट कर चल दूँगी अपनी रंग बिरंगी साड़ियां सब सहेजे गए चुन-चुन कर लिए दुपट्टे अच्छे बुरे वक्त की लिखी डायरियाँ सोने चाँदी के गहनें मन को बहलाने के लिए बनाई पेंटिंग लकड़ी के फ्रेम, बीस तरह की ब्रश रंग-बिरंगे धागे और घुंघरूं वाली लटकन दुनिया भर के नेलपेंट और लिपस्टिक से भरे डिब्बे शीशे पर चिपकी हुई बिंदिया। समेट कर चल दूंगी रसोई की सारी खुशबू अपनी हथेली में उठा कर चल पडूंगी सारी धरती अपने ही सिर पीतल की टोकनी के ज्यों अब बोलो क्या बचेगा तुम्हारा चार जोड़ी कपड़ों के सिवा इस घर में ? "मोरनी"
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  • रघुकुल नायक राम के साथ, करते हैं हम वीर हनुमान को प्रणाम .....
    रघुकुल नायक राम के साथ, करते हैं हम वीर हनुमान को प्रणाम .....🙏🚩🙇
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  • बाहर की दुनिया बदलती रहेगी
    दिक्कत परेशानी सब चलती रहेगी
    पर तु नदी सा ना उनके संग बह जा
    खुद को स्थिर पहाड बना
    तु खुद में ठहराव ला
    चौदह दिन बढे चांद फिर आगे घटे चांद
    तु उस चांद सा ना हो जा,
    जो अमावस में भी पूरा रहे खुद को ऐसा सूरज बना
    तु खुद में ठहराव ला
    पतझड सावन सब एक से
    तु टहनी पर ना जा
    जो सूखे में भी जिंदा रहे खुद को ऐसा बीज बना
    तु खुद में ठहराव ला
    शरारतें कम और सपनों को साकार कर
    एक नया इतिहास लिख लोगों की बातों पर ना जा
    जो तुमको तुम्हारा वज़ूद दे खुद को ऐसा इंसान बना
    तू खुद में ठहराव ला, तु खुद में ठहराव ला ।।
    "मोरनी"
    बाहर की दुनिया बदलती रहेगी दिक्कत परेशानी सब चलती रहेगी पर तु नदी सा ना उनके संग बह जा खुद को स्थिर पहाड बना तु खुद में ठहराव ला चौदह दिन बढे चांद फिर आगे घटे चांद तु उस चांद सा ना हो जा, जो अमावस में भी पूरा रहे खुद को ऐसा सूरज बना तु खुद में ठहराव ला पतझड सावन सब एक से तु टहनी पर ना जा जो सूखे में भी जिंदा रहे खुद को ऐसा बीज बना तु खुद में ठहराव ला शरारतें कम और सपनों को साकार कर एक नया इतिहास लिख लोगों की बातों पर ना जा जो तुमको तुम्हारा वज़ूद दे खुद को ऐसा इंसान बना तू खुद में ठहराव ला, तु खुद में ठहराव ला ।। "मोरनी"
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  • एहतराम करुंगी मैं हमेशा तुम्हारा..
    चुपचाप यूँ ही बस नज़रें झुकाकर!

    चले आना जब थकने लगे शब्द!
    बैठना, काँधे पर मेरे सिर को टिका कर!

    न शर्तें , न वादे , न किस्से, न कहानी..
    लाना बस खुद को एक विद्यार्थी बनाकर!

    दो पल जो गुजारेंगे हम शामे खामोशी में..
    बारहा गुनगुनाऊँगी उन्हें मैं नज़्में बनाकर!

    तुम्हें जाना तो पड़ेगा हर बार की तरह ..
    थोड़ा सा मगर रख लूँगी दुआओं में छुपाकर!
    "मोरनी"
    एहतराम करुंगी मैं हमेशा तुम्हारा.. चुपचाप यूँ ही बस नज़रें झुकाकर! चले आना जब थकने लगे शब्द! बैठना, काँधे पर मेरे सिर को टिका कर! न शर्तें , न वादे , न किस्से, न कहानी.. लाना बस खुद को एक विद्यार्थी बनाकर! दो पल जो गुजारेंगे हम शामे खामोशी में.. बारहा गुनगुनाऊँगी उन्हें मैं नज़्में बनाकर! तुम्हें जाना तो पड़ेगा हर बार की तरह .. थोड़ा सा मगर रख लूँगी दुआओं में छुपाकर! "मोरनी"
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  • Conserve water Conserve energy
    Conserve wildlife and plant a tree
    Recycle reduce reuse
    Resources are few
    Kindly don't misuse
    Say no to plastic
    Use eco-friendly devices
    That makes change fantastic
    Make mother earth to dwell
    Which we have made a hell.
    "Morni"
    Conserve water Conserve energy Conserve wildlife and plant a tree Recycle reduce reuse Resources are few Kindly don't misuse Say no to plastic Use eco-friendly devices That makes change fantastic Make mother earth to dwell Which we have made a hell. "Morni"
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  • किते चुप रहणा बणै समाधान, किते आवाज ठाणी पङै
    किते दब ज्या पूरा मुद्दा, किते एक शब्द कहाणी बणै
    किते मुफ्त मै मिलज्या सब, किते सांसा की भी कीमत चुकाणी पङै
    किते आदमी तरसै प्यासा अर किते आंख्यां तै भी पाणी पङै।
    "मोरनी"

    किते चुप रहणा बणै समाधान, किते आवाज ठाणी पङै किते दब ज्या पूरा मुद्दा, किते एक शब्द कहाणी बणै किते मुफ्त मै मिलज्या सब, किते सांसा की भी कीमत चुकाणी पङै किते आदमी तरसै प्यासा अर किते आंख्यां तै भी पाणी पङै। "मोरनी"
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  • छोड़ जाना भी छोड़ कर जाना नहीं होता है
    चले जाने के बाद भी चले जाना रह जाता है

    शेष बहुत कुछ छूट जाता है वहीं उसी मोड़ पर
    चले जाता है जब कोई यूं अधूरा कुछ छोड़ कर

    कैसे झुठला सकोगे कि हम अब तुम्हारे साथ नहीं
    दूर होने के बाद पहले से भी ज्यादा अब पास नहीं

    तुम हमारी दुआओं में महफूज़ हो हमेशा के लिए
    शुक्रगुजार हूं उन पलों का जो हमने साथ जिये

    कुछ कभी याद आए तो आंखें अपनी नम न करना
    जाना तो पड़ता ही है इस बात का तुम गम न करना
    "मोरनी"
    छोड़ जाना भी छोड़ कर जाना नहीं होता है चले जाने के बाद भी चले जाना रह जाता है शेष बहुत कुछ छूट जाता है वहीं उसी मोड़ पर चले जाता है जब कोई यूं अधूरा कुछ छोड़ कर कैसे झुठला सकोगे कि हम अब तुम्हारे साथ नहीं दूर होने के बाद पहले से भी ज्यादा अब पास नहीं तुम हमारी दुआओं में महफूज़ हो हमेशा के लिए शुक्रगुजार हूं उन पलों का जो हमने साथ जिये कुछ कभी याद आए तो आंखें अपनी नम न करना जाना तो पड़ता ही है इस बात का तुम गम न करना "मोरनी"
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  • शब्द भ्रम हैं शब्द खोखले
    शब्दों से मत भरमाओ तुम
    शब्द मायावी शब्द कल्पना
    यथार्थ से मत घबराओ तुम
    शब्द राख हैं शब्द निरर्थक
    समझो और समझाओ तुम
    शब्द उलझाते शब्द बहलाते
    मत शब्दों का जाल फैलाओ तुम
    मेरा मौन तो मूक बधिर है
    पहचाने केवल प्रेम की भाषा
    तुम्हारे शब्द हैं तीक्ष्ण बाण से
    जो हैं मेरे मन पर घाव ।।
    "मोरनी"
    शब्द भ्रम हैं शब्द खोखले शब्दों से मत भरमाओ तुम शब्द मायावी शब्द कल्पना यथार्थ से मत घबराओ तुम शब्द राख हैं शब्द निरर्थक समझो और समझाओ तुम शब्द उलझाते शब्द बहलाते मत शब्दों का जाल फैलाओ तुम मेरा मौन तो मूक बधिर है पहचाने केवल प्रेम की भाषा तुम्हारे शब्द हैं तीक्ष्ण बाण से जो हैं मेरे मन पर घाव ।। "मोरनी"
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