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बाहर की दुनिया बदलती रहेगी
दिक्कत परेशानी सब चलती रहेगी
पर तु नदी सा ना उनके संग बह जा
खुद को स्थिर पहाड बना
तु खुद में ठहराव ला
चौदह दिन बढे चांद फिर आगे घटे चांद
तु उस चांद सा ना हो जा,
जो अमावस में भी पूरा रहे खुद को ऐसा सूरज बना
तु खुद में ठहराव ला
पतझड सावन सब एक से
तु टहनी पर ना जा
जो सूखे में भी जिंदा रहे खुद को ऐसा बीज बना
तु खुद में ठहराव ला
शरारतें कम और सपनों को साकार कर
एक नया इतिहास लिख लोगों की बातों पर ना जा
जो तुमको तुम्हारा वज़ूद दे खुद को ऐसा इंसान बना
तू खुद में ठहराव ला, तु खुद में ठहराव ला ।।
"मोरनी"
बाहर की दुनिया बदलती रहेगी दिक्कत परेशानी सब चलती रहेगी पर तु नदी सा ना उनके संग बह जा खुद को स्थिर पहाड बना तु खुद में ठहराव ला चौदह दिन बढे चांद फिर आगे घटे चांद तु उस चांद सा ना हो जा, जो अमावस में भी पूरा रहे खुद को ऐसा सूरज बना तु खुद में ठहराव ला पतझड सावन सब एक से तु टहनी पर ना जा जो सूखे में भी जिंदा रहे खुद को ऐसा बीज बना तु खुद में ठहराव ला शरारतें कम और सपनों को साकार कर एक नया इतिहास लिख लोगों की बातों पर ना जा जो तुमको तुम्हारा वज़ूद दे खुद को ऐसा इंसान बना तू खुद में ठहराव ला, तु खुद में ठहराव ला ।। "मोरनी"
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