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  • बच्चे सा बन जाना चाहती हूँ
    बच्चे सा मन पाना चाहती हूँ
    वो सब कुछ पाना चाहती हूँ
    दोबारा बचपन जीना चाहती हूँ
    बाहों भरा संसार पाना चाहती हूँ
    आँखों भर गगन पाना चाहती हूँ
    धूल में मिल जाना चाहती हूँ
    मिट्टी में सन जाना चाहती हूँ
    बाप की उंगली थामना चाहती हूँ
    माँ का आंचल पाना चाहती हूँ
    मैं फ़िर से बचपन को जीना चाहती हूँ
    "मोरनी"
    बच्चे सा बन जाना चाहती हूँ बच्चे सा मन पाना चाहती हूँ वो सब कुछ पाना चाहती हूँ दोबारा बचपन जीना चाहती हूँ बाहों भरा संसार पाना चाहती हूँ आँखों भर गगन पाना चाहती हूँ धूल में मिल जाना चाहती हूँ मिट्टी में सन जाना चाहती हूँ बाप की उंगली थामना चाहती हूँ माँ का आंचल पाना चाहती हूँ मैं फ़िर से बचपन को जीना चाहती हूँ "मोरनी"
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  • या तर्क कर या तकरार कर
    जो भी है इज़हार कर
    दिल को दिल और दिमाग़ को दिमाग़ रहने दे
    पासे एक कर या नफ़रत कर या प्यार कर
    मुँह पर और पीठ पीछे और
    क्यूँ रखता है मन में चोर
    इस चोर का भोरा नी ज़ोर
    ऐसे ही करता है मन कमज़ोर
    दो कर बेशक चार कर
    गिनती तेरी है बेशक हज़ार कर
    पर पासे एक कर
    नफ़रत कर या प्यार कर l
    "मोरनी"
    या तर्क कर या तकरार कर जो भी है इज़हार कर दिल को दिल और दिमाग़ को दिमाग़ रहने दे पासे एक कर या नफ़रत कर या प्यार कर मुँह पर और पीठ पीछे और क्यूँ रखता है मन में चोर इस चोर का भोरा नी ज़ोर ऐसे ही करता है मन कमज़ोर दो कर बेशक चार कर गिनती तेरी है बेशक हज़ार कर पर पासे एक कर नफ़रत कर या प्यार कर l "मोरनी"
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  • अहम को खरा भी खोटा नज़र आता है
    कीड़े को आक भी बरगद नज़र आता है
    अकल से अपाहिज का दोष कोई नहीं
    क्यूँकि दूर से और ग़ुरूर से हर कोई छोटा नज़र आता है l
    अहम को खरा भी खोटा नज़र आता है कीड़े को आक भी बरगद नज़र आता है अकल से अपाहिज का दोष कोई नहीं क्यूँकि दूर से और ग़ुरूर से हर कोई छोटा नज़र आता है l
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  • सिरसा...
    ये शहर बहुत पसन्द है मुझे
    जब भी यहां आती हूँ
    लगता है घर आ गया
    इसका एक एक कोना
    एक एक हिस्सा याद है मुझे
    वो संकरी गलियां
    वो खुले मिजाज़ के लोग
    वो सखियाँ वो नाते
    पूरा मुहल्ला मिलकर त्योहार मनाते
    किसी से हो या ना हो
    इस शहर से मुहब्बत है मुझे l
    "मोरनी"

    सिरसा... ये शहर बहुत पसन्द है मुझे जब भी यहां आती हूँ लगता है घर आ गया इसका एक एक कोना एक एक हिस्सा याद है मुझे वो संकरी गलियां वो खुले मिजाज़ के लोग वो सखियाँ वो नाते पूरा मुहल्ला मिलकर त्योहार मनाते किसी से हो या ना हो इस शहर से मुहब्बत है मुझे l "मोरनी"
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  • ये बनारस सी गलियां
    उसके आस-पास होने का एहसास दिलाती हैं
    साथ में चाँद को देखते देखते चलना
    बहुत से ख़यालों को लपेटे रहना
    जहाँ भी जाऊँ सदाएं देती हैं
    वापिस बुलाती हैं
    यहाँ का हर कोना उसकी महक से तारी(fresh) है
    इश्क़ कल तक उसने निभाया
    आज मेरी बारी है l
    "मोरनी"
    ये बनारस सी गलियां उसके आस-पास होने का एहसास दिलाती हैं साथ में चाँद को देखते देखते चलना बहुत से ख़यालों को लपेटे रहना जहाँ भी जाऊँ सदाएं देती हैं वापिस बुलाती हैं यहाँ का हर कोना उसकी महक से तारी(fresh) है इश्क़ कल तक उसने निभाया आज मेरी बारी है l "मोरनी"
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