🙏🏻🙏🏻
अगर मैं कभी अपना श्रेष्ठ लिख पाई तो
मैं पुरुष को लिखना चाहूँगी...
लिखूँगी उसका त्याग
उसकी वो ख़ामोशी से दी गई कुर्बानी
लिखूँगी उसका आत्म सम्मान
जो रोज़ बचाकर रखता है
लिखूँगी ज़िम्मेदारी तले दबे इंसान को
जो कोई ख्वाहिश नहीं रखता
लिखूँगी उसके कन्धों पर रखे बोझ को
जो बिना किसी शर्त के ढोता है
लिखूँगी उसकी मेहनत उसकी थकान को
उसकी अधूरी नींद को
अगर लिख पाई तो लिखूँगी
कि इतनी कुर्बानियों के बाद भी वो मुस्कुरा रहा है
अगर लिख पाऊँ तो
पुरुष को लिखना चाहूँगी ll
"मोरनी"
अगर मैं कभी अपना श्रेष्ठ लिख पाई तो
मैं पुरुष को लिखना चाहूँगी...
लिखूँगी उसका त्याग
उसकी वो ख़ामोशी से दी गई कुर्बानी
लिखूँगी उसका आत्म सम्मान
जो रोज़ बचाकर रखता है
लिखूँगी ज़िम्मेदारी तले दबे इंसान को
जो कोई ख्वाहिश नहीं रखता
लिखूँगी उसके कन्धों पर रखे बोझ को
जो बिना किसी शर्त के ढोता है
लिखूँगी उसकी मेहनत उसकी थकान को
उसकी अधूरी नींद को
अगर लिख पाई तो लिखूँगी
कि इतनी कुर्बानियों के बाद भी वो मुस्कुरा रहा है
अगर लिख पाऊँ तो
पुरुष को लिखना चाहूँगी ll
"मोरनी"
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अगर मैं कभी अपना श्रेष्ठ लिख पाई तो
मैं पुरुष को लिखना चाहूँगी...
लिखूँगी उसका त्याग
उसकी वो ख़ामोशी से दी गई कुर्बानी
लिखूँगी उसका आत्म सम्मान
जो रोज़ बचाकर रखता है
लिखूँगी ज़िम्मेदारी तले दबे इंसान को
जो कोई ख्वाहिश नहीं रखता
लिखूँगी उसके कन्धों पर रखे बोझ को
जो बिना किसी शर्त के ढोता है
लिखूँगी उसकी मेहनत उसकी थकान को
उसकी अधूरी नींद को
अगर लिख पाई तो लिखूँगी
कि इतनी कुर्बानियों के बाद भी वो मुस्कुरा रहा है
अगर लिख पाऊँ तो
पुरुष को लिखना चाहूँगी ll
"मोरनी"
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