किसी पुरुष का प्रेम पा लेना
निःसंदेह सौभाग्य है
पर उसके हृदय में
वह एकमात्र स्त्री बन जाना
जिसके आगे उसकी सारी चाहतें
सारी तलाशें और सारी बेचैनियां
आकर ठहर जाएँ
जहाँ उसके मन को
किसी और को देखने की ज़रूरत ही ना रहे
और उसकी आत्मा को सुकून
केवल तुम्हारे होने से मिले
शायद प्रेम में इससे बड़ी
सौभाग्य की बुलंदी क्या ही होगी l
"मोरनी"
निःसंदेह सौभाग्य है
पर उसके हृदय में
वह एकमात्र स्त्री बन जाना
जिसके आगे उसकी सारी चाहतें
सारी तलाशें और सारी बेचैनियां
आकर ठहर जाएँ
जहाँ उसके मन को
किसी और को देखने की ज़रूरत ही ना रहे
और उसकी आत्मा को सुकून
केवल तुम्हारे होने से मिले
शायद प्रेम में इससे बड़ी
सौभाग्य की बुलंदी क्या ही होगी l
"मोरनी"
किसी पुरुष का प्रेम पा लेना
निःसंदेह सौभाग्य है
पर उसके हृदय में
वह एकमात्र स्त्री बन जाना
जिसके आगे उसकी सारी चाहतें
सारी तलाशें और सारी बेचैनियां
आकर ठहर जाएँ
जहाँ उसके मन को
किसी और को देखने की ज़रूरत ही ना रहे
और उसकी आत्मा को सुकून
केवल तुम्हारे होने से मिले
शायद प्रेम में इससे बड़ी
सौभाग्य की बुलंदी क्या ही होगी l
"मोरनी"
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