Sponsored
Promoted Posts
घर में बीवी लौकी की सब्जी खाने में रखे
तो चुप चाप पनीर समझ के खा लेना चाहिए।

Dubey_writes
घर में बीवी लौकी की सब्जी खाने में रखे तो चुप चाप पनीर समझ के खा लेना चाहिए। Dubey_writes
Like
Love
Haha
5
0 Comments 0 Shares 1K Views
  • बेशक रात अंधेरी है
    रातों की वो पहरी है
    मैं टूटा तारा ढूंढ रही हूँ
    अधूरी ख़्वाहिश मेरी है
    चाँद साथ हो तो बात बने
    एक बात लबों पर ठहरी है
    कौन समझे दुःख दर्द मेरे
    दुनिया तो अंधी बहरी है
    तन्हाई मेरी सहेली है
    महफ़िल मेरी बैरी है l
    "मोरनी"
    बेशक रात अंधेरी है रातों की वो पहरी है मैं टूटा तारा ढूंढ रही हूँ अधूरी ख़्वाहिश मेरी है चाँद साथ हो तो बात बने एक बात लबों पर ठहरी है कौन समझे दुःख दर्द मेरे दुनिया तो अंधी बहरी है तन्हाई मेरी सहेली है महफ़िल मेरी बैरी है l "मोरनी"
    0 Comments 0 Shares 5 Views
  • अस्थिर हो गयी है ज़िंदगी
    मुसाफ़िर हो गयी है ज़िंदगी
    ख्वाहिशों के जाल से
    घिर गयी है ज़िंदगी
    सुकून बग़ैर जीने में
    माहिर हो गयी है ज़िंदगी
    सबके दाम बढ़ गए हैं
    मग़र गिर गयी है ज़िंदगी
    जज़्बातों के मर जाने से
    काफ़िर हो गयी है ज़िंदगी l
    "मोरनी"
    अस्थिर हो गयी है ज़िंदगी मुसाफ़िर हो गयी है ज़िंदगी ख्वाहिशों के जाल से घिर गयी है ज़िंदगी सुकून बग़ैर जीने में माहिर हो गयी है ज़िंदगी सबके दाम बढ़ गए हैं मग़र गिर गयी है ज़िंदगी जज़्बातों के मर जाने से काफ़िर हो गयी है ज़िंदगी l "मोरनी"
    0 Comments 0 Shares 19 Views
  • रिश्तों में खटास में पङ रही है
    दौलत की प्यास बढ़ रही है
    सास बहू से लङ रही है
    बहू सास से लङ रही है
    बेटे को दो दिन लगेंगे विदेश से आने में
    गांव में बुढ़ी माँ की लाश सङ रही है
    ज़रूरत जमींदोज़ हो चुकी है
    ख़्वाहिश आकाश चढ़ रही है
    मैं उसे विनाश लिख रही हूँ
    दुनिया जिसे विकास पढ़ रही है l
    "मोरनी"
    रिश्तों में खटास में पङ रही है दौलत की प्यास बढ़ रही है सास बहू से लङ रही है बहू सास से लङ रही है बेटे को दो दिन लगेंगे विदेश से आने में गांव में बुढ़ी माँ की लाश सङ रही है ज़रूरत जमींदोज़ हो चुकी है ख़्वाहिश आकाश चढ़ रही है मैं उसे विनाश लिख रही हूँ दुनिया जिसे विकास पढ़ रही है l "मोरनी"
    0 Comments 0 Shares 96 Views
  • लिख लिख कर रख रही हूँ
    यानी बोलने से बच रही हूँ
    तुम कुछ समझ नहीं रहे हो
    मैं आसानी से समझा रही हूँ
    कभी तुम नजरें उठा रहे हो
    कभी मैं नजरें झुका रही हूँ
    इशारों ही इशारों में तुम
    कई पहेलियाँ बुझा रहे हो l
    "मोरनी"
    लिख लिख कर रख रही हूँ यानी बोलने से बच रही हूँ तुम कुछ समझ नहीं रहे हो मैं आसानी से समझा रही हूँ कभी तुम नजरें उठा रहे हो कभी मैं नजरें झुका रही हूँ इशारों ही इशारों में तुम कई पहेलियाँ बुझा रहे हो l "मोरनी"
    0 Comments 0 Shares 117 Views
  • जो अच्छा लगे वही करें
    दुनिया की परवाह किए बग़ैर
    जो अच्छा लगे वही करें
    ख़ुद को गुमराह किए बग़ैर
    जो अच्छा लगे वही करें
    अंजाम की फ़िक्र किए बग़ैर
    जो अच्छा लगे वही करें
    दूसरों से सलाह लिए बग़ैर l
    "मोरनी"
    जो अच्छा लगे वही करें दुनिया की परवाह किए बग़ैर जो अच्छा लगे वही करें ख़ुद को गुमराह किए बग़ैर जो अच्छा लगे वही करें अंजाम की फ़िक्र किए बग़ैर जो अच्छा लगे वही करें दूसरों से सलाह लिए बग़ैर l "मोरनी"
    0 Comments 0 Shares 133 Views
  • मरहम जैसे लग रहे हैं आप
    महरम(who keeps secret)जैसे लग रहे हैं आप
    दुश्मन जैसी इस दुनिया में
    दोस्त जैसे लग रहे हैं आप
    मुझ पर अनवरत बरस रही
    शबनम जैसे लग रहे हैं आप
    जैसे ख़्वाबों में मैंने सोचा था
    एकदम वैसे लग रहे हैं आप
    "मोरनी"
    मरहम जैसे लग रहे हैं आप महरम(who keeps secret)जैसे लग रहे हैं आप दुश्मन जैसी इस दुनिया में दोस्त जैसे लग रहे हैं आप मुझ पर अनवरत बरस रही शबनम जैसे लग रहे हैं आप जैसे ख़्वाबों में मैंने सोचा था एकदम वैसे लग रहे हैं आप "मोरनी"
    0 Comments 0 Shares 161 Views
More Stories
Sponsored