रिश्तों में खटास में पङ रही है
दौलत की प्यास बढ़ रही है
सास बहू से लङ रही है
बहू सास से लङ रही है
बेटे को दो दिन लगेंगे विदेश से आने में
गांव में बुढ़ी माँ की लाश सङ रही है
ज़रूरत जमींदोज़ हो चुकी है
ख़्वाहिश आकाश चढ़ रही है
मैं उसे विनाश लिख रही हूँ
दुनिया जिसे विकास पढ़ रही है l
"मोरनी"
रिश्तों में खटास में पङ रही है
दौलत की प्यास बढ़ रही है
सास बहू से लङ रही है
बहू सास से लङ रही है
बेटे को दो दिन लगेंगे विदेश से आने में
गांव में बुढ़ी माँ की लाश सङ रही है
ज़रूरत जमींदोज़ हो चुकी है
ख़्वाहिश आकाश चढ़ रही है
मैं उसे विनाश लिख रही हूँ
दुनिया जिसे विकास पढ़ रही है l
"मोरनी"