कहते हैं...
वक़्त कभी नहीं रुकता
मग़र ऐसा भी नहीं है
सबकी ज़िंदगी में कभी ना कभी
रुक ही जाता है
किसी लम्हे में, किसी शब्द में
किसी अक़्स में, किसी शख़्स में
तब तो कमबख्त अपनी चाल भूलकर
ठहर ही जाता है,
जैसे तुम्हें खिड़की के पास देख कर
दोनों का खिड़की के बाहर झांकना
उस वक़्त तो जैसे सबकुछ रुक गया था l
कुछ कहा भी नहीं और वो लम्हा सब कह गया l
"मोरनी"
कहते हैं...
वक़्त कभी नहीं रुकता
मग़र ऐसा भी नहीं है
सबकी ज़िंदगी में कभी ना कभी
रुक ही जाता है
किसी लम्हे में, किसी शब्द में
किसी अक़्स में, किसी शख़्स में ☺️
तब तो कमबख्त अपनी चाल भूलकर
ठहर ही जाता है,
जैसे तुम्हें खिड़की के पास देख कर 😍
दोनों का खिड़की के बाहर झांकना
उस वक़्त तो जैसे सबकुछ रुक गया था l
कुछ कहा भी नहीं और वो लम्हा सब कह गया l
"मोरनी"