Sponsored
Promoted Posts
घर में बीवी लौकी की सब्जी खाने में रखे
तो चुप चाप पनीर समझ के खा लेना चाहिए।

Dubey_writes
घर में बीवी लौकी की सब्जी खाने में रखे तो चुप चाप पनीर समझ के खा लेना चाहिए। Dubey_writes
Like
Love
Haha
5
0 Comments 0 Shares 2K Views
  • ज़िन्दगी के पिंजरे में कैद,
    कुछ कहानियाँ मेरी भी हैं…

    तेरे परों में सुस्ताती थकी सी,
    ठिठकी उड़ान चिरैया तेरी भी है…

    सलाखों से उन्मुक्त हो जीवन,
    अभिलाषा तेरी भी है, मेरी भी है…

    बदलते हैं मौसम, बदलेगी तक़दीर,
    उम्मीद का दाना चुगते हैं हम दोनों…

    खामोशियों की नदी बहती है अभी,
    दर्द की लहर तेज़ है, गहरी भी है…

    पर देख—क्षितिज कहीं तो मुस्काता है,
    सुबह उजली और शाम सुनहरी भी है…
    "मोरनी"
    ज़िन्दगी के पिंजरे में कैद, कुछ कहानियाँ मेरी भी हैं… तेरे परों में सुस्ताती थकी सी, ठिठकी उड़ान चिरैया तेरी भी है… सलाखों से उन्मुक्त हो जीवन, अभिलाषा तेरी भी है, मेरी भी है… बदलते हैं मौसम, बदलेगी तक़दीर, उम्मीद का दाना चुगते हैं हम दोनों… खामोशियों की नदी बहती है अभी, दर्द की लहर तेज़ है, गहरी भी है… पर देख—क्षितिज कहीं तो मुस्काता है, सुबह उजली और शाम सुनहरी भी है… "मोरनी"
    0 Comments 0 Shares 0 Views
  • उसके चेहरे पर पहुंच कर ठहरे हैं ll
    मेरे नैनों के उसके नैनों पर पहरे हैं ll

    कुछ सुनने को तैयार ही नहीं,
    मेरे दोनों नैना एकदम बहरे हैं ll

    देखने भर से नशा छा गया,
    उसके नैना इतने मदभरे हैं ll

    मेरे नैना सब-कुछ गवाही दे रहे हैं,
    उसके नैना हैं कि कोई कटघरे हैं ll

    इनकी गहराइयों में डूबता जा रहा हूँ,
    उसके नैनों के दरिया बहुत गहरे हैं ll
    "मोरनी"
    उसके चेहरे पर पहुंच कर ठहरे हैं ll मेरे नैनों के उसके नैनों पर पहरे हैं ll कुछ सुनने को तैयार ही नहीं, मेरे दोनों नैना एकदम बहरे हैं ll देखने भर से नशा छा गया, उसके नैना इतने मदभरे हैं ll मेरे नैना सब-कुछ गवाही दे रहे हैं, उसके नैना हैं कि कोई कटघरे हैं ll इनकी गहराइयों में डूबता जा रहा हूँ, उसके नैनों के दरिया बहुत गहरे हैं ll "मोरनी"
    0 Comments 0 Shares 72 Views
  • 0 Comments 0 Shares 325 Views
  • 0 Comments 0 Shares 325 Views
  • 0 Comments 0 Shares 325 Views
  • बड़े बुजुर्गों से सीखा है
    मैंने तजुर्बों से सीखा है
    अंत में यहीं छोड़ना पड़ता है
    खाली हाथ लिए मुर्दों से सीखा है
    शरीर रूपी मशीन का क्या भरोसा
    टूटते हुए कलपुर्जों से सीखा है
    अच्छे लोगों से सब सीखते हैं
    मैंने तो सब बुरों से सीखा है
    दिमाग वाले सब दगाबाज़ हैं
    मैंने प्रेम करना बच्चों से सीखा है l
    "मोरनी"
    बड़े बुजुर्गों से सीखा है मैंने तजुर्बों से सीखा है अंत में यहीं छोड़ना पड़ता है खाली हाथ लिए मुर्दों से सीखा है शरीर रूपी मशीन का क्या भरोसा टूटते हुए कलपुर्जों से सीखा है अच्छे लोगों से सब सीखते हैं मैंने तो सब बुरों से सीखा है दिमाग वाले सब दगाबाज़ हैं मैंने प्रेम करना बच्चों से सीखा है l "मोरनी"
    Love
    1
    0 Comments 0 Shares 937 Views
More Stories
Sponsored