Sponsored
Promoted Posts
Answer comment kro
#friblex
Answer comment kro #friblex
Like
Love
5
9 Comments 0 Shares 2K Views
  • मेरी खिड़की इतनी बड़ी है
    जिससे चाँद आ सके
    पर चांद तो
    हर रात नहीं आता
    कभी बादल आ जाते हैं
    कभी मैं ही आँखें मूंद लेती हूँ
    फ़िर भी
    खिड़की खुली रखती हूँ
    इस उम्मीद में नहीं कि
    चाँद आएगा
    बल्कि इस यकीन में कि
    रास्ता खुला रहना चाहिए
    आने वाले के लिए ll
    "मोरनी"

    मेरी खिड़की इतनी बड़ी है जिससे चाँद आ सके पर चांद तो हर रात नहीं आता कभी बादल आ जाते हैं कभी मैं ही आँखें मूंद लेती हूँ फ़िर भी खिड़की खुली रखती हूँ इस उम्मीद में नहीं कि चाँद आएगा बल्कि इस यकीन में कि रास्ता खुला रहना चाहिए आने वाले के लिए ll "मोरनी"
    0 Comments 0 Shares 90 Views
  • खूब पढ़ो...
    इसलिए नहीं कि लोग तुम्हें ज्ञानी कहें
    पढ़ो ताकि तुम्हारे अंदर का शोर थमे
    सोच दूसरों से उधार ना लेनी पड़े
    यहां हर कोई बोलने को तैयार है
    तुम्हें हर बात का उत्तर देना ज़रूरी नहीं
    ज्ञान का असली अर्थ बहस जीतना नहीं
    बल्कि इतना स्पष्ट हो जाना कि बहस की ज़रूरत ही ना पड़े
    दुनिया को प्रभावित करने के लिए मत पढ़ो
    अपने भीतर ऐसी समझ जगाने के लिए पढ़ो
    जिसके बाद दुनिया कुछ भी कहे
    तुम भीतर से विचलित ना हो ll
    "मोरनी"
    खूब पढ़ो... इसलिए नहीं कि लोग तुम्हें ज्ञानी कहें पढ़ो ताकि तुम्हारे अंदर का शोर थमे सोच दूसरों से उधार ना लेनी पड़े यहां हर कोई बोलने को तैयार है तुम्हें हर बात का उत्तर देना ज़रूरी नहीं ज्ञान का असली अर्थ बहस जीतना नहीं बल्कि इतना स्पष्ट हो जाना कि बहस की ज़रूरत ही ना पड़े दुनिया को प्रभावित करने के लिए मत पढ़ो अपने भीतर ऐसी समझ जगाने के लिए पढ़ो जिसके बाद दुनिया कुछ भी कहे तुम भीतर से विचलित ना हो ll "मोरनी"
    0 Comments 0 Shares 634 Views
  • ख़ुद से स्वीकारना पसन्द है मुझे
    गलतियाँ सुधरना पसन्द है मुझे
    लङकर जीतने से अच्छा
    बिना लड़े हारना पसन्द है मुझे
    बहुत जिम्मेदार हो गयी हूँ
    संस्कारों को सम्भालना पसन्द है मुझे
    बुलंदियों की नहीं शौकीन मैं
    आसमान निहारना पसन्द है मुझे
    लोग रखते हैं शौक अकड़ कर चलने का
    सिर झुका कर चलना पसन्द है मुझे ll
    "मोरनी"
    ख़ुद से स्वीकारना पसन्द है मुझे गलतियाँ सुधरना पसन्द है मुझे लङकर जीतने से अच्छा बिना लड़े हारना पसन्द है मुझे बहुत जिम्मेदार हो गयी हूँ संस्कारों को सम्भालना पसन्द है मुझे बुलंदियों की नहीं शौकीन मैं आसमान निहारना पसन्द है मुझे लोग रखते हैं शौक अकड़ कर चलने का सिर झुका कर चलना पसन्द है मुझे ll "मोरनी"
    0 Comments 0 Shares 705 Views
  • मैं पूछती माँ से
    ये पुराने से कपड़े
    क्यों पहने रहती हो
    नए वालों को
    अलमारी में संभाल क्यों रखती हो
    वो कहती
    नए कपड़े चुभते हैं मुझे
    मैं हंस दिया करती
    तुम भी ना माँ
    कैसे कैसे बहाने बनाने लगी हो
    मगर देखो ना अब मैं भी
    नए कपड़े पहनने से
    कतराने लगी हूँ
    अब माँ की वो चुभन
    समझने लगी हूँ
    क्योंकि मैं भी माँ वाला सुकून
    कपड़ों में पाने लगी हूँ
    अब लग रहा है
    धीरे धीरे मैं भी
    माँ सी होने लगी हूँ l
    "मोरनी"
    मैं पूछती माँ से ये पुराने से कपड़े क्यों पहने रहती हो नए वालों को अलमारी में संभाल क्यों रखती हो वो कहती नए कपड़े चुभते हैं मुझे मैं हंस दिया करती तुम भी ना माँ कैसे कैसे बहाने बनाने लगी हो मगर देखो ना अब मैं भी नए कपड़े पहनने से कतराने लगी हूँ अब माँ की वो चुभन समझने लगी हूँ क्योंकि मैं भी माँ वाला सुकून कपड़ों में पाने लगी हूँ अब लग रहा है धीरे धीरे मैं भी माँ सी होने लगी हूँ l "मोरनी"
    0 Comments 0 Shares 751 Views
  • 🙏🏻🙏🏻
    अगर मैं कभी अपना श्रेष्ठ लिख पाई तो
    मैं पुरुष को लिखना चाहूँगी...
    लिखूँगी उसका त्याग
    उसकी वो ख़ामोशी से दी गई कुर्बानी
    लिखूँगी उसका आत्म सम्मान
    जो रोज़ बचाकर रखता है
    लिखूँगी ज़िम्मेदारी तले दबे इंसान को
    जो कोई ख्वाहिश नहीं रखता
    लिखूँगी उसके कन्धों पर रखे बोझ को
    जो बिना किसी शर्त के ढोता है
    लिखूँगी उसकी मेहनत उसकी थकान को
    उसकी अधूरी नींद को
    अगर लिख पाई तो लिखूँगी
    कि इतनी कुर्बानियों के बाद भी वो मुस्कुरा रहा है
    अगर लिख पाऊँ तो
    पुरुष को लिखना चाहूँगी ll
    "मोरनी"
    🙏🏻🙏🏻 अगर मैं कभी अपना श्रेष्ठ लिख पाई तो मैं पुरुष को लिखना चाहूँगी... लिखूँगी उसका त्याग उसकी वो ख़ामोशी से दी गई कुर्बानी लिखूँगी उसका आत्म सम्मान जो रोज़ बचाकर रखता है लिखूँगी ज़िम्मेदारी तले दबे इंसान को जो कोई ख्वाहिश नहीं रखता लिखूँगी उसके कन्धों पर रखे बोझ को जो बिना किसी शर्त के ढोता है लिखूँगी उसकी मेहनत उसकी थकान को उसकी अधूरी नींद को अगर लिख पाई तो लिखूँगी कि इतनी कुर्बानियों के बाद भी वो मुस्कुरा रहा है अगर लिख पाऊँ तो पुरुष को लिखना चाहूँगी ll "मोरनी"
    0 Comments 0 Shares 1K Views
  • किसने कहा आसान है ज़िंदगी
    मौत का बस सामान है ज़िंदगी
    सबक मिले ही नहीं किताबों में
    उन्हीं का ही इम्तिहान है ज़िंदगी
    मुक्कदर ने लिखी दर्द की दास्तानें
    उन सभी की पहचान है ज़िंदगी
    मैं सहरा-सहरा भटकती मुसाफ़िर
    पाँवों का मामूली निशान है ज़िंदगी
    तुझसे क्या गिला और कैसा शिकवा
    तू चार दिनों की मेहमान है ज़िंदगी ll
    "मोरनी"
    किसने कहा आसान है ज़िंदगी मौत का बस सामान है ज़िंदगी सबक मिले ही नहीं किताबों में उन्हीं का ही इम्तिहान है ज़िंदगी मुक्कदर ने लिखी दर्द की दास्तानें उन सभी की पहचान है ज़िंदगी मैं सहरा-सहरा भटकती मुसाफ़िर पाँवों का मामूली निशान है ज़िंदगी तुझसे क्या गिला और कैसा शिकवा तू चार दिनों की मेहमान है ज़िंदगी ll "मोरनी"
    0 Comments 0 Shares 1K Views
More Stories
Sponsored