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  • कहते हैं...
    वक़्त कभी नहीं रुकता
    मग़र ऐसा भी नहीं है
    सबकी ज़िंदगी में कभी ना कभी
    रुक ही जाता है
    किसी लम्हे में, किसी शब्द में
    किसी अक़्स में, किसी शख़्स में
    तब तो कमबख्त अपनी चाल भूलकर
    ठहर ही जाता है,
    जैसे तुम्हें खिड़की के पास देख कर
    दोनों का खिड़की के बाहर झांकना
    उस वक़्त तो जैसे सबकुछ रुक गया था l
    कुछ कहा भी नहीं और वो लम्हा सब कह गया l
    "मोरनी"
    कहते हैं... वक़्त कभी नहीं रुकता मग़र ऐसा भी नहीं है सबकी ज़िंदगी में कभी ना कभी रुक ही जाता है किसी लम्हे में, किसी शब्द में किसी अक़्स में, किसी शख़्स में ☺️ तब तो कमबख्त अपनी चाल भूलकर ठहर ही जाता है, जैसे तुम्हें खिड़की के पास देख कर 😍 दोनों का खिड़की के बाहर झांकना उस वक़्त तो जैसे सबकुछ रुक गया था l कुछ कहा भी नहीं और वो लम्हा सब कह गया l "मोरनी"
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  • किसी पुरुष का प्रेम पा लेना
    निःसंदेह सौभाग्य है
    पर उसके हृदय में
    वह एकमात्र स्त्री बन जाना
    जिसके आगे उसकी सारी चाहतें
    सारी तलाशें और सारी बेचैनियां
    आकर ठहर जाएँ
    जहाँ उसके मन को
    किसी और को देखने की ज़रूरत ही ना रहे
    और उसकी आत्मा को सुकून
    केवल तुम्हारे होने से मिले
    शायद प्रेम में इससे बड़ी
    सौभाग्य की बुलंदी क्या ही होगी l
    "मोरनी"
    किसी पुरुष का प्रेम पा लेना निःसंदेह सौभाग्य है पर उसके हृदय में वह एकमात्र स्त्री बन जाना जिसके आगे उसकी सारी चाहतें सारी तलाशें और सारी बेचैनियां आकर ठहर जाएँ जहाँ उसके मन को किसी और को देखने की ज़रूरत ही ना रहे और उसकी आत्मा को सुकून केवल तुम्हारे होने से मिले शायद प्रेम में इससे बड़ी सौभाग्य की बुलंदी क्या ही होगी l "मोरनी"
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  • कभी कभी सोचती हूँ मैं
    किताबें पढ़ना ज्यादा अच्छा लगता है
    या उन्हें मेज पर सजा कर रखना,
    कुछ किताबें तो ऐसी हैं
    जो एक बार में पूरी पढ़ ली
    कुछ ऐसी हैं जो रख ली
    ताकि जब मन उदास हो तो उन्हें खोलूं,
    क्योंकि मुझे कहानियां पढ़ना पसन्द ही नहीं
    बल्कि उनको पास रखना भी पसन्द है l
    ज़रूरी नहीं उनको उसी वक़्त पढ़ूं
    कुछ को दिल के पास रखती हूँ
    मैं किताबें खरीदती नहीं बल्कि
    उनकी एक दुनिया बसाती हूँ l
    "मोरनी"
    कभी कभी सोचती हूँ मैं किताबें पढ़ना ज्यादा अच्छा लगता है या उन्हें मेज पर सजा कर रखना, कुछ किताबें तो ऐसी हैं जो एक बार में पूरी पढ़ ली कुछ ऐसी हैं जो रख ली ताकि जब मन उदास हो तो उन्हें खोलूं, क्योंकि मुझे कहानियां पढ़ना पसन्द ही नहीं बल्कि उनको पास रखना भी पसन्द है l ज़रूरी नहीं उनको उसी वक़्त पढ़ूं कुछ को दिल के पास रखती हूँ मैं किताबें खरीदती नहीं बल्कि उनकी एक दुनिया बसाती हूँ l "मोरनी"
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  • मेरी खिड़की इतनी बड़ी है
    जिससे चाँद आ सके
    पर चांद तो
    हर रात नहीं आता
    कभी बादल आ जाते हैं
    कभी मैं ही आँखें मूंद लेती हूँ
    फ़िर भी
    खिड़की खुली रखती हूँ
    इस उम्मीद में नहीं कि
    चाँद आएगा
    बल्कि इस यकीन में कि
    रास्ता खुला रहना चाहिए
    आने वाले के लिए ll
    "मोरनी"

    मेरी खिड़की इतनी बड़ी है जिससे चाँद आ सके पर चांद तो हर रात नहीं आता कभी बादल आ जाते हैं कभी मैं ही आँखें मूंद लेती हूँ फ़िर भी खिड़की खुली रखती हूँ इस उम्मीद में नहीं कि चाँद आएगा बल्कि इस यकीन में कि रास्ता खुला रहना चाहिए आने वाले के लिए ll "मोरनी"
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  • खूब पढ़ो...
    इसलिए नहीं कि लोग तुम्हें ज्ञानी कहें
    पढ़ो ताकि तुम्हारे अंदर का शोर थमे
    सोच दूसरों से उधार ना लेनी पड़े
    यहां हर कोई बोलने को तैयार है
    तुम्हें हर बात का उत्तर देना ज़रूरी नहीं
    ज्ञान का असली अर्थ बहस जीतना नहीं
    बल्कि इतना स्पष्ट हो जाना कि बहस की ज़रूरत ही ना पड़े
    दुनिया को प्रभावित करने के लिए मत पढ़ो
    अपने भीतर ऐसी समझ जगाने के लिए पढ़ो
    जिसके बाद दुनिया कुछ भी कहे
    तुम भीतर से विचलित ना हो ll
    "मोरनी"
    खूब पढ़ो... इसलिए नहीं कि लोग तुम्हें ज्ञानी कहें पढ़ो ताकि तुम्हारे अंदर का शोर थमे सोच दूसरों से उधार ना लेनी पड़े यहां हर कोई बोलने को तैयार है तुम्हें हर बात का उत्तर देना ज़रूरी नहीं ज्ञान का असली अर्थ बहस जीतना नहीं बल्कि इतना स्पष्ट हो जाना कि बहस की ज़रूरत ही ना पड़े दुनिया को प्रभावित करने के लिए मत पढ़ो अपने भीतर ऐसी समझ जगाने के लिए पढ़ो जिसके बाद दुनिया कुछ भी कहे तुम भीतर से विचलित ना हो ll "मोरनी"
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  • ख़ुद से स्वीकारना पसन्द है मुझे
    गलतियाँ सुधरना पसन्द है मुझे
    लङकर जीतने से अच्छा
    बिना लड़े हारना पसन्द है मुझे
    बहुत जिम्मेदार हो गयी हूँ
    संस्कारों को सम्भालना पसन्द है मुझे
    बुलंदियों की नहीं शौकीन मैं
    आसमान निहारना पसन्द है मुझे
    लोग रखते हैं शौक अकड़ कर चलने का
    सिर झुका कर चलना पसन्द है मुझे ll
    "मोरनी"
    ख़ुद से स्वीकारना पसन्द है मुझे गलतियाँ सुधरना पसन्द है मुझे लङकर जीतने से अच्छा बिना लड़े हारना पसन्द है मुझे बहुत जिम्मेदार हो गयी हूँ संस्कारों को सम्भालना पसन्द है मुझे बुलंदियों की नहीं शौकीन मैं आसमान निहारना पसन्द है मुझे लोग रखते हैं शौक अकड़ कर चलने का सिर झुका कर चलना पसन्द है मुझे ll "मोरनी"
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