मेरी खिड़की इतनी बड़ी है
जिससे चाँद आ सके
पर चांद तो
हर रात नहीं आता
कभी बादल आ जाते हैं
कभी मैं ही आँखें मूंद लेती हूँ
फ़िर भी
खिड़की खुली रखती हूँ
इस उम्मीद में नहीं कि
चाँद आएगा
बल्कि इस यकीन में कि
रास्ता खुला रहना चाहिए
आने वाले के लिए ll
"मोरनी"
जिससे चाँद आ सके
पर चांद तो
हर रात नहीं आता
कभी बादल आ जाते हैं
कभी मैं ही आँखें मूंद लेती हूँ
फ़िर भी
खिड़की खुली रखती हूँ
इस उम्मीद में नहीं कि
चाँद आएगा
बल्कि इस यकीन में कि
रास्ता खुला रहना चाहिए
आने वाले के लिए ll
"मोरनी"
मेरी खिड़की इतनी बड़ी है
जिससे चाँद आ सके
पर चांद तो
हर रात नहीं आता
कभी बादल आ जाते हैं
कभी मैं ही आँखें मूंद लेती हूँ
फ़िर भी
खिड़की खुली रखती हूँ
इस उम्मीद में नहीं कि
चाँद आएगा
बल्कि इस यकीन में कि
रास्ता खुला रहना चाहिए
आने वाले के लिए ll
"मोरनी"
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