मैं पूछती माँ से
ये पुराने से कपड़े
क्यों पहने रहती हो
नए वालों को
अलमारी में संभाल क्यों रखती हो
वो कहती
नए कपड़े चुभते हैं मुझे
मैं हंस दिया करती
तुम भी ना माँ
कैसे कैसे बहाने बनाने लगी हो
मगर देखो ना अब मैं भी
नए कपड़े पहनने से
कतराने लगी हूँ
अब माँ की वो चुभन
समझने लगी हूँ
क्योंकि मैं भी माँ वाला सुकून
कपड़ों में पाने लगी हूँ
अब लग रहा है
धीरे धीरे मैं भी
माँ सी होने लगी हूँ l
"मोरनी"
ये पुराने से कपड़े
क्यों पहने रहती हो
नए वालों को
अलमारी में संभाल क्यों रखती हो
वो कहती
नए कपड़े चुभते हैं मुझे
मैं हंस दिया करती
तुम भी ना माँ
कैसे कैसे बहाने बनाने लगी हो
मगर देखो ना अब मैं भी
नए कपड़े पहनने से
कतराने लगी हूँ
अब माँ की वो चुभन
समझने लगी हूँ
क्योंकि मैं भी माँ वाला सुकून
कपड़ों में पाने लगी हूँ
अब लग रहा है
धीरे धीरे मैं भी
माँ सी होने लगी हूँ l
"मोरनी"
मैं पूछती माँ से
ये पुराने से कपड़े
क्यों पहने रहती हो
नए वालों को
अलमारी में संभाल क्यों रखती हो
वो कहती
नए कपड़े चुभते हैं मुझे
मैं हंस दिया करती
तुम भी ना माँ
कैसे कैसे बहाने बनाने लगी हो
मगर देखो ना अब मैं भी
नए कपड़े पहनने से
कतराने लगी हूँ
अब माँ की वो चुभन
समझने लगी हूँ
क्योंकि मैं भी माँ वाला सुकून
कपड़ों में पाने लगी हूँ
अब लग रहा है
धीरे धीरे मैं भी
माँ सी होने लगी हूँ l
"मोरनी"
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