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शब्द मेरे ये पंछी बनकर
इस नभ को छू लें आज
बंधन सारे छोड़कर पिछे
खुद को एक विस्तार दें आज
काग़ज़ से चुपचाप उठकर
अर्थों को पंख लगाएं आज
अक्षर सभी फ़िर साँसें बनकर
अनदेखे जहां तक जाएँ आज
जो कह ना पाऊँ वो उङ जाय
नीलाम्बर में खोकर आज
मेरे होने का एहसास दे
तुम्हारे मन को छू कर आज
ना रुके ये ना ही थम पायें
बस अर्थों में ढलते जाएँ आज
शब्द नहीं ये पंख मेरे हैं
मुझको भी साथ उड़ायें आज l
"मोरनी"
शब्द मेरे ये पंछी बनकर इस नभ को छू लें आज बंधन सारे छोड़कर पिछे खुद को एक विस्तार दें आज काग़ज़ से चुपचाप उठकर अर्थों को पंख लगाएं आज अक्षर सभी फ़िर साँसें बनकर अनदेखे जहां तक जाएँ आज जो कह ना पाऊँ वो उङ जाय नीलाम्बर में खोकर आज मेरे होने का एहसास दे तुम्हारे मन को छू कर आज ना रुके ये ना ही थम पायें बस अर्थों में ढलते जाएँ आज शब्द नहीं ये पंख मेरे हैं मुझको भी साथ उड़ायें आज l "मोरनी"
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