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लिख लिख कर रख रही हूँ
यानी बोलने से बच रही हूँ
तुम कुछ समझ नहीं रहे हो
मैं आसानी से समझा रही हूँ
कभी तुम नजरें उठा रहे हो
कभी मैं नजरें झुका रही हूँ
इशारों ही इशारों में तुम
कई पहेलियाँ बुझा रहे हो l
"मोरनी"
लिख लिख कर रख रही हूँ यानी बोलने से बच रही हूँ तुम कुछ समझ नहीं रहे हो मैं आसानी से समझा रही हूँ कभी तुम नजरें उठा रहे हो कभी मैं नजरें झुका रही हूँ इशारों ही इशारों में तुम कई पहेलियाँ बुझा रहे हो l "मोरनी"
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