Sponsored
लिख लिख कर रख रही हूँ
यानी बोलने से बच रही हूँ
तुम कुछ समझ नहीं रहे हो
मैं आसानी से समझा रही हूँ
कभी तुम नजरें उठा रहे हो
कभी मैं नजरें झुका रही हूँ
इशारों ही इशारों में तुम
कई पहेलियाँ बुझा रहे हो l
"मोरनी"
लिख लिख कर रख रही हूँ यानी बोलने से बच रही हूँ तुम कुछ समझ नहीं रहे हो मैं आसानी से समझा रही हूँ कभी तुम नजरें उठा रहे हो कभी मैं नजरें झुका रही हूँ इशारों ही इशारों में तुम कई पहेलियाँ बुझा रहे हो l "मोरनी"
0 Comments 0 Shares 224 Views
Sponsored