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बनाया है मैंने ये घर धीरे धीरे
खुले मेरे ख्वाबों के पर धीरे धीरे
किसी को गिराया ना ख़ुद को उछाला
कटा ज़िंदगी का सफ़र धीरे धीरे
जहाँ आप पहुंचे छलांगें लगाकर
वहां मैं भी पहुंची मग़र धीरे धीरे
गिरी मैं कहीं तो अकेले में रोई
गया दर्द से घाव भर धीरे धीरे
मिला क्या न मुझको ए दुनिया तुम्हारी
मुहब्बत मिली मग़र धीरे धीरे
किसी को गिराया ना ख़ुद को उछाला
कटा ज़िन्दगी का सफ़र धीरे धीरे l
"मोरनी"
बनाया है मैंने ये घर धीरे धीरे खुले मेरे ख्वाबों के पर धीरे धीरे किसी को गिराया ना ख़ुद को उछाला कटा ज़िंदगी का सफ़र धीरे धीरे जहाँ आप पहुंचे छलांगें लगाकर वहां मैं भी पहुंची मग़र धीरे धीरे गिरी मैं कहीं तो अकेले में रोई गया दर्द से घाव भर धीरे धीरे मिला क्या न मुझको ए दुनिया तुम्हारी मुहब्बत मिली मग़र धीरे धीरे किसी को गिराया ना ख़ुद को उछाला कटा ज़िन्दगी का सफ़र धीरे धीरे l "मोरनी"
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