पीली ओढ़ चुनरिया आया
धरती ने ये आंगन सजाया
फैला खुशियों का उजियारा
मौसम सर्द बसंत से हारा
वर्षा को भी संग ये लाया
कोयल की कुहू कुहू से मन भरमाया
हर पत्ता है पुलकित पुलकित
फूलों ने भी गीत है गाया
माँ ने भी वीणा है बजाई
शिक्षा की ये अलख जगाई
रंग बिरंगी पतंगें आई
आसमान में हैं सब छाई
करो शरद को विदा तुम आज
होगा अब बसंत का आगाज l
"मोरनी"
धरती ने ये आंगन सजाया
फैला खुशियों का उजियारा
मौसम सर्द बसंत से हारा
वर्षा को भी संग ये लाया
कोयल की कुहू कुहू से मन भरमाया
हर पत्ता है पुलकित पुलकित
फूलों ने भी गीत है गाया
माँ ने भी वीणा है बजाई
शिक्षा की ये अलख जगाई
रंग बिरंगी पतंगें आई
आसमान में हैं सब छाई
करो शरद को विदा तुम आज
होगा अब बसंत का आगाज l
"मोरनी"
पीली ओढ़ चुनरिया आया
धरती ने ये आंगन सजाया
फैला खुशियों का उजियारा
मौसम सर्द बसंत से हारा
वर्षा को भी संग ये लाया
कोयल की कुहू कुहू से मन भरमाया
हर पत्ता है पुलकित पुलकित
फूलों ने भी गीत है गाया
माँ ने भी वीणा है बजाई
शिक्षा की ये अलख जगाई
रंग बिरंगी पतंगें आई
आसमान में हैं सब छाई
करो शरद को विदा तुम आज
होगा अब बसंत का आगाज l
"मोरनी"