कांपते होंठ
धुंधला सवेरा
रातें लम्बी गिरती ओस,
और धूप ग़ायब है
सर्दियाँ बढ़ चुकी हैं,
सुबह का आलम
चाय का कप और
अख़बार की सुर्खियाँ
कि छुट्टियाँ बढ़ चुकी हैं l
"मोरनी"
धुंधला सवेरा
रातें लम्बी गिरती ओस,
और धूप ग़ायब है
सर्दियाँ बढ़ चुकी हैं,
सुबह का आलम
चाय का कप और
अख़बार की सुर्खियाँ
कि छुट्टियाँ बढ़ चुकी हैं l
"मोरनी"
कांपते होंठ
धुंधला सवेरा
रातें लम्बी गिरती ओस,
और धूप ग़ायब है
सर्दियाँ बढ़ चुकी हैं,
सुबह का आलम
चाय का कप और
अख़बार की सुर्खियाँ
कि छुट्टियाँ बढ़ चुकी हैं l
😍😜
"मोरनी"