Sponsored
सुकूं से इश्क़ कर बैठी हूँ
अब नहीं भाता कुछ और
शोर शराबों से दूर रहती हूँ
अब तन्हाई पसन्द है
भीड़ से सिहरन में रहती हूँ
इस ख़ामोशी में कुछ तो बात है
जो ग़मों को कुछ कम सहती हूँ
ख़ुद को ख़ुद का अज़ीज़ बना रखा है
हाँ सुकूं से इश्क़ कर रखा है l
"मोरनी"
सुकूं से इश्क़ कर बैठी हूँ अब नहीं भाता कुछ और शोर शराबों से दूर रहती हूँ अब तन्हाई पसन्द है भीड़ से सिहरन में रहती हूँ इस ख़ामोशी में कुछ तो बात है जो ग़मों को कुछ कम सहती हूँ ख़ुद को ख़ुद का अज़ीज़ बना रखा है हाँ सुकूं से इश्क़ कर रखा है l "मोरनी"
Love
1
0 Comments 0 Shares 253 Views
Sponsored