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चुप रहूँ मैं, सहूं मैं
बोलूँ तो बदतमीज हूँ मैं
क्यूंकि औरत हूँ मैं
घूंघट करूं मैं, सिर झुकाऊं मैं
देखे कोई और तो बदचलन हूँ मैं
क्यूंकि औरत हूँ मैं
पराये घर की मैं, बेघर मैं
क्यूंकि औरत हूँ मैं
पढ़ी लिखी मैं, समझदार मैं
पेशे से गृहणी हूँ मैं
क्यूंकि औरत हूँ मैं
बेटी मैं, पत्नी मैं
बात हक की हो
तो सिर्फ़ औरत हूँ मैं l
"मोरनी"
हो सकता है कइयों को नागवार हो 🙏🏻
चुप रहूँ मैं, सहूं मैं बोलूँ तो बदतमीज हूँ मैं क्यूंकि औरत हूँ मैं घूंघट करूं मैं, सिर झुकाऊं मैं देखे कोई और तो बदचलन हूँ मैं क्यूंकि औरत हूँ मैं पराये घर की मैं, बेघर मैं क्यूंकि औरत हूँ मैं पढ़ी लिखी मैं, समझदार मैं पेशे से गृहणी हूँ मैं क्यूंकि औरत हूँ मैं बेटी मैं, पत्नी मैं बात हक की हो तो सिर्फ़ औरत हूँ मैं l "मोरनी" हो सकता है कइयों को नागवार हो 🙏🏻
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