प्रिय सखी
बिन धागे की सूई से
ज़ख़्मों को सीना
सीख रही हूं
तुम्हारा होकर भी न होना
तुम बिन जीना
सीख रही हूं
अपनी कोई जमीन रही न
आसमान के खालीपन में
ख़्वाबों को बोना सीख रही हूं
खुद को बहलाना तन्हाई में
दुनिया भर की रुसवाई पे
हंसकर रोना सीख रही हूं
"मोरनी"
बिन धागे की सूई से
ज़ख़्मों को सीना
सीख रही हूं
तुम्हारा होकर भी न होना
तुम बिन जीना
सीख रही हूं
अपनी कोई जमीन रही न
आसमान के खालीपन में
ख़्वाबों को बोना सीख रही हूं
खुद को बहलाना तन्हाई में
दुनिया भर की रुसवाई पे
हंसकर रोना सीख रही हूं
"मोरनी"
प्रिय सखी❤️
बिन धागे की सूई से
ज़ख़्मों को सीना
सीख रही हूं
तुम्हारा होकर भी न होना
तुम बिन जीना
सीख रही हूं
अपनी कोई जमीन रही न
आसमान के खालीपन में
ख़्वाबों को बोना सीख रही हूं
खुद को बहलाना तन्हाई में
दुनिया भर की रुसवाई पे
हंसकर रोना सीख रही हूं
"मोरनी"