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सच कहूँ
तो
जो अनकहा रहा
तुम्हारे मेरे दरमियाँ

वही तो अहम् रहा
वही तो है वही तो था
सहेज लिया

तुमने भी मैनें भी
अब कहने को
क्या बाकी रहा?

क्या यही वह प्रेम है
मीरा का विष
जो आख़िर
अमृत हुआ...

कुछ तो था
कुछ तो है
कुछ तो होगा
तेरे मेरे दरमियाँ...
"मोरनी"
सच कहूँ तो जो अनकहा रहा तुम्हारे मेरे दरमियाँ वही तो अहम् रहा वही तो है वही तो था सहेज लिया तुमने भी मैनें भी अब कहने को क्या बाकी रहा? क्या यही वह प्रेम है मीरा का विष जो आख़िर अमृत हुआ... कुछ तो था कुछ तो है कुछ तो होगा तेरे मेरे दरमियाँ... "मोरनी"
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