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वो जो मुट्ठीभर धूप
बचाकर रखी थी
तुम्हारे लिए

इस ठिठुरते विरह में
अहसासों को जमने से रोकने में
खर्च कर दी मैने...
"मोरनी"
वो जो मुट्ठीभर धूप बचाकर रखी थी तुम्हारे लिए इस ठिठुरते विरह में अहसासों को जमने से रोकने में खर्च कर दी मैने... "मोरनी"
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