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मुझे टूटने से गुरेज़ नहीं...
गर कोई मुराद तुम्हारी
मुक्कमल हो !

लाखों करोड़ों सितारों से
जहान तुम्हारा हमेशा
रोशन हो !

मुझे खो जाने का ख़ौफ़ नहीं
हासिल तुम्हें जो
मंजिल हो !

मुझे और तो कोई हसरत नहीं
बस नज़रें तुम्हारी
इनायत हों !

मुझे ईबादत की कोई ज़रूरत नहीं
जो तुमको मुझसे
मोहब्बत हो !
"मोरनी"
मुझे टूटने से गुरेज़ नहीं... गर कोई मुराद तुम्हारी मुक्कमल हो ! लाखों करोड़ों सितारों से जहान तुम्हारा हमेशा रोशन हो ! मुझे खो जाने का ख़ौफ़ नहीं हासिल तुम्हें जो मंजिल हो ! मुझे और तो कोई हसरत नहीं बस नज़रें तुम्हारी इनायत हों ! मुझे ईबादत की कोई ज़रूरत नहीं जो तुमको मुझसे मोहब्बत हो ! "मोरनी"
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