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नीड़ को ज्यों लौटें खग - विहग
हर दिन ढ़लती सुरमई शाम...

समेट उलझे मोह के धागे विस्तृत सारे
बटोही..चेत अब ..जाना है निज धाम...

कर्म ही पूजा.. कर्म जब हों सभी निष्काम...
समर्पित गुण-अवगुण मेरे, तुझको मेरे राम !

व्यर्थ चिंतन तज मन मेरे, श्रद्धा का दामन थाम...
कर्ता - कारणहार वही है..तेरा तो बस नाम !
"मोरनी"
नीड़ को ज्यों लौटें खग - विहग हर दिन ढ़लती सुरमई शाम... समेट उलझे मोह के धागे विस्तृत सारे बटोही..चेत अब ..जाना है निज धाम... कर्म ही पूजा.. कर्म जब हों सभी निष्काम... समर्पित गुण-अवगुण मेरे, तुझको मेरे राम ! व्यर्थ चिंतन तज मन मेरे, श्रद्धा का दामन थाम... कर्ता - कारणहार वही है..तेरा तो बस नाम ! "मोरनी"
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  • शब्द मेरे ये पंछी बनकर
    इस नभ को छू लें आज
    बंधन सारे छोड़कर पिछे
    खुद को एक विस्तार दें आज
    काग़ज़ से चुपचाप उठकर
    अर्थों को पंख लगाएं आज
    अक्षर सभी फ़िर साँसें बनकर
    अनदेखे जहां तक जाएँ आज
    जो कह ना पाऊँ वो उङ जाय
    नीलाम्बर में खोकर आज
    मेरे होने का एहसास दे
    तुम्हारे मन को छू कर आज
    ना रुके ये ना ही थम पायें
    बस अर्थों में ढलते जाएँ आज
    शब्द नहीं ये पंख मेरे हैं
    मुझको भी साथ उड़ायें आज l
    "मोरनी"
    शब्द मेरे ये पंछी बनकर इस नभ को छू लें आज बंधन सारे छोड़कर पिछे खुद को एक विस्तार दें आज काग़ज़ से चुपचाप उठकर अर्थों को पंख लगाएं आज अक्षर सभी फ़िर साँसें बनकर अनदेखे जहां तक जाएँ आज जो कह ना पाऊँ वो उङ जाय नीलाम्बर में खोकर आज मेरे होने का एहसास दे तुम्हारे मन को छू कर आज ना रुके ये ना ही थम पायें बस अर्थों में ढलते जाएँ आज शब्द नहीं ये पंख मेरे हैं मुझको भी साथ उड़ायें आज l "मोरनी"
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  • मैं शहर का शोर शराबा
    तुम गांव से शांत प्रिये
    मैं उलझा हुआ सा ख्वाब कोई
    तुम सुलझी हुई सी बात प्रिये
    मैं दोपहर की चिकचिक
    तुम सुकून भरी सी सुबह प्रिये
    मैं दूरियों का पैमाना
    तुम हसीन मुलाकात प्रिये
    मैं बिखरा हुआ सा ज़वाब तेरा
    तू सिमटा हुआ सवाल प्रिये
    मैं थोड़ी अलग इस दुनिया से
    मग़र मिलते हैं तुझसे ख़यालात प्रिये l
    "मोरनी"
    मैं शहर का शोर शराबा तुम गांव से शांत प्रिये मैं उलझा हुआ सा ख्वाब कोई तुम सुलझी हुई सी बात प्रिये मैं दोपहर की चिकचिक तुम सुकून भरी सी सुबह प्रिये मैं दूरियों का पैमाना तुम हसीन मुलाकात प्रिये मैं बिखरा हुआ सा ज़वाब तेरा तू सिमटा हुआ सवाल प्रिये मैं थोड़ी अलग इस दुनिया से मग़र मिलते हैं तुझसे ख़यालात प्रिये l "मोरनी"
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  • सफ़र गुज़र जाएगा
    एक दिन कुछ ना रहेगा
    ना तुम ना मैं
    बस एक कहानी रहेगी
    मेरी और तुम्हारी
    तो इस कहानी को
    थोड़ा शिद्दत से लिखना
    क्योंकि लोग पढ़े भी तो
    महसूस करें हम दोनों को
    हमारे जाने के बाद भी
    लिखना वो खूबसूरत भूरी आँखें
    वो घुंघराले बाल वो मतवाली चाल
    और वो बला की खूबसूरत मुस्कान
    लिखना वो मेरा इंतज़ार करना
    और तुम्हारा देर से आना
    मेरा रूठना और तुम्हारा मनाना
    वो प्यार वो मनुहार
    हरपल तुम्हें चाहने की चाहत
    लिखना तुम ज़िंदगी को
    एक ख़ूबसूरत लम्हे में
    ताकि हम रहें लोगों की
    जुबां पर और उनके दिल में ll
    "मोरनी"

    सफ़र गुज़र जाएगा एक दिन कुछ ना रहेगा ना तुम ना मैं बस एक कहानी रहेगी मेरी और तुम्हारी तो इस कहानी को थोड़ा शिद्दत से लिखना क्योंकि लोग पढ़े भी तो महसूस करें हम दोनों को हमारे जाने के बाद भी लिखना वो खूबसूरत भूरी आँखें वो घुंघराले बाल वो मतवाली चाल और वो बला की खूबसूरत मुस्कान लिखना वो मेरा इंतज़ार करना और तुम्हारा देर से आना मेरा रूठना और तुम्हारा मनाना वो प्यार वो मनुहार हरपल तुम्हें चाहने की चाहत लिखना तुम ज़िंदगी को एक ख़ूबसूरत लम्हे में ताकि हम रहें लोगों की जुबां पर और उनके दिल में ll "मोरनी"
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