पहले घर की से भी ना घबराई थी
अब तो फर्निचर की से भी डरूं मैं
क्योंकि हर महीने ये सवाल है
किश्त कहां से भरूं मैं
इस बार किससे उधार लूँ
नया लोन ले पुराना उतार लूँ
हिसाब किया तो आंखें फिर गयीं
सारी कमाई मेरी किधर गयी
कुएं में या खाई में गिरूं मैं
किश्त कहां से भरूं मैं
घरवाले मदद को न इक आना दें
कम पड़ जाये तो बस ताना दें
कंधों पर इतना भार लिए
सारे शौक मैंने मार लिए
दो कपड़े लेने को भी सेल का इंतजार करूं मैं
किश्त कहां से भरूं मैं
अब तो बीमा से भी ये सवाल है
कि जिऊं या मरूं मैं
किश्त कहाँ से भरूं मैं किश्त कहां से भरूं मैं
"मोरनी"
पहले घर की से भी ना घबराई थी
अब तो फर्निचर की से भी डरूं मैं
क्योंकि हर महीने ये सवाल है
किश्त कहां से भरूं मैं
इस बार किससे उधार लूँ
नया लोन ले पुराना उतार लूँ
हिसाब किया तो आंखें फिर गयीं
सारी कमाई मेरी किधर गयी
कुएं में या खाई में गिरूं मैं
किश्त कहां से भरूं मैं
घरवाले मदद को न इक आना दें
कम पड़ जाये तो बस ताना दें
कंधों पर इतना भार लिए
सारे शौक मैंने मार लिए
दो कपड़े लेने को भी सेल का इंतजार करूं मैं
किश्त कहां से भरूं मैं
अब तो बीमा से भी ये सवाल है
कि जिऊं या मरूं मैं
किश्त कहाँ से भरूं मैं किश्त कहां से भरूं मैं
"मोरनी"